मईल। भागलपुर ब्लॉक के नरसिंहडाड़ गांव में राजस्व अभिलेखों में जलमग्न भूमि (तालाब की जमीन) के रूप में दर्ज है। वहां से अवैध रूप से मिट्टी निकाले जाने के मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने गंभीरता से लिया है। नरसिहडाढ़ गांव के अनुराग कुमार ने ग्रामवासियों की ओर से दायर जनहित याचिका में यह आरोप लगाया कि तालाब की भूमि से नियमों के खिलाफ खनन कार्य हो रहा है, जिससे पर्यावरण को नुकसान और ग्रामीणों के हितों की अनदेखी हो रही है।
राज्य सरकार की ओर से जो रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत की गई, वह स्वयं खनन निरीक्षक द्वारा हस्ताक्षरित थी, जबकि वही अधिकारी याचिका में प्रतिवादी हैं। अदालत ने इस पर गंभीर आपत्ति जताते हुए उक्त रिपोर्ट को अविश्वसनीय मानकर खारिज कर दिया। याचिका में यह भी उल्लेख किया गया कि ग्रामीणों द्वारा ग्राम प्रधान के खिलाफ लगातार शिकायतें की जाती रही, लेकिन खनन निरीक्षक द्वारा उन्हीं ग्राम प्रधान से रिपोर्ट मंगाई जाती थी। अंततः अनुराग कुमार ने उच्च न्यायालय की शरण ली।
मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली की अध्यक्षता वाली हाईकोर्ट की डबल बेंच ने सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि प्रतिवादी अधिकारी की ओर से दी गई रिपोर्ट को स्वीकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि स्टैंडिंग काउंसिल द्वारा जो अनुदेश प्रस्तुत किए गए हैं, वे यद्यपि यह दर्शाते हैं कि जिलाधिकारी द्वारा भेजे गए हैं, परंतु वास्तव में वे उस खनन निरीक्षक द्वारा भेजे और हस्ताक्षरित किए गए हैं, जिसके विरुद्ध याचिका में आरोप लगाए गए हैं। इसलिए जिलाधिकारी को निर्देश दिया कि वे इस मामले में स्वतंत्र, निष्पक्ष और प्रमाणिक रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत करें।