पकड़ियार बाजार। नेबुआ नौरंगिया ब्लाॅक के ग्राम पंचायत चखनी भोज छपरा गांव में विकास कार्य में अनियमितता की जांच शुरू हो गई है। शिकायतकर्ता की हृदयाघात से मौत हो गई। वहीं, भ्रष्टाचार की जांच को लेकर ग्रामीणों ने फिर से मामले की जांच के लिए प्रार्थनापत्र दिया है।
इस मामले में मृत शिकायतकर्ता के भाई का आरोप है कि प्रधान के भ्रष्टाचार की शिकायत के बाद उसने ही भाई को प्रताड़ित किया, जिसके कारण उसकी मौत हुई है। वहीं अब वर्तमान में शिकायत करने वालों पर भी प्रधानपति ने केस दर्ज करा दिया गया है। इससे कहीं न कहीं दाल में कुछ काला होने की आशंका प्रबल हो गई है। वहीं प्रधानपति ने आरोपों को निराधार बताया है।
गांव के प्रतिष्ठित परिवार से ताल्लुक रखने वाले स्व. अशोक गोविंद राव ने देखा कि गांव के विकास कार्य मनमाने ढंग से कराया जा रहा है। इसमें भ्रष्टाचार का बोलबाला है। प्रधानपति से इसकी शिकायत कई बार की, लेकिन मानक के अनुसार विकास कार्य नहीं कराया जा सका। इससे नाराज होकर वह दो नवंबर 2023 को उन्होंने डीएम को पत्र सौंपकर गांव के अमृतसरोवर, खेल मैदान व मनरेगा से कराए गए कार्यों की जांच कराने की मांग की। उनके चचेरे भाई प्रभू गोविंद राव व छोटे भाई महेंद्र गोविंद राव के अनुसार भैया ने जब शिकायत की तो प्रधानपति उन पर नाराज हो गया और मानसिक प्रताड़ना देने लगा। कप्तानगंज से भैया घर लौट रहे थे तो प्रधानपति अपने दरवाजे के सामने रोककर उनके साथ हाथापाई की। लोग बीच-बचाव कर मामला शांत कराया। इससे उनको बहुत ही आघात पहुंचा। उस दिन से वह मायूस रहने लगे। 14 जनवरी 2024 को उनको हृदयाघात के बाद इलाज के लिए गोरखपुर गए, लेकिन 16 जनवरी को उनकी मौत हो गई। प्रभू गोविंद राव ने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में भैया ने जान गंवा दी, लेकिन अधिकारी आज भी लीपापोती करने में लगे हैं।
इन कार्यों की जांच कराने की ग्रामीण कर रहे हैं मांग : अमृत सरोवर, खेल मैदान, इंटरलॉकिंग, कुआं मरम्मत, नाली व मनरेगा के तहत हुई सभी विकास कार्य।
बगैर जेई और अभिलेख की जांच :
शुक्रवार को मत्स्य अधिकारी जांच करने गांव में पहुंची थी, लेकिन जांच महज मजाक बन गया। अवर अभियंता और ग्रामीण नहीं आए। वहीं स्पष्ट दिख रहे खस्ताहाल इंटरलॉकिंग सड़क की जांच यह कह कर टाल दी गई कि यह जांच बिंदु में शामिल नहीं है। पूर्व में ही जब संबंधित जेई और सचिव को अभिलेखों के साथ मौके पर जांच के दौरान उपस्थित रहने के लिए पत्र जारी किया गया था। बावजूद कोई नहीं पहुंचा। शिकायतकर्ता मदन कुशवाहा, सुरेंद्र पाल, मुन्नू पाल ने आरोप लगाया कि ब्लाॅक और जिले के जिम्मेदारों के मिली भगत से कोई कार्रवाई नहीं हो पा रही है।