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Kushinagar News: तटबंध ही नहीं, नारायणी की धार भी साधेगी सरकार

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कुशीनगर : बाढ़ के पानी मे फंसे ग्रामीणों को रेस्कयू के लिए डीएम-एसपी को समझाते मुख्यमंत्री। स्रो - फोटो : Samvad
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कुशीनगर। नारायणी के इस बार के रौद्र रूप ने केवल तटबंधों की मजबूती ही नहीं, बल्कि नदी की धारा को व्यवस्थित करने की जरूरत भी सामने ला दी है। 5.5 लाख क्यूसेक तक पहुंचे जलप्रवाह के दबाव में तटबंधों के क्षतिग्रस्त होने के बाद सरकार ने अब तात्कालिक मरम्मत से आगे बढ़कर बाढ़ के दीर्घकालिक समाधान की तैयारी शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को नारायणी नदी की ड्रेजिंग और चैनलाइजेशन के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।
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मुख्यमंत्री ने जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह और सिंचाई विभाग के प्रमुख सचिव को इस संबंध में कार्ययोजना तैयार करने को कहा है। इसका उद्देश्य नदी में जमा गाद को हटाकर उसकी जलधारण क्षमता और गहराई बढ़ाना, जलप्रवाह को सुचारु करना तथा भविष्य में अत्यधिक जलप्रवाह की स्थिति में तटबंधों पर पड़ने वाले दबाव को कम करना है। निकाली गई गाद के समुचित उपयोग की संभावनाएं भी कार्ययोजना में शामिल की जाएंगी। मुख्यमंत्री ने तेज बहाव से क्षतिग्रस्त तटबंधों की तत्काल मरम्मत के साथ उनके स्थायी सुदृढ़ीकरण के निर्देश भी दिए हैं। सरकार का प्रयास है कि तटबंधों को इस तरह मजबूत किया जाए कि भविष्य में नदी का जलस्तर और जलप्रवाह बढ़ने पर भी आबादी वाले इलाकों में बाढ़ का खतरा कम से कम हो।
अधिकारियों के अनुसार ड्रेजिंग के माध्यम से नदी की तलहटी में जमा गाद को हटाकर उसकी गहराई बढ़ाई जा सकती है। वहीं, चैनलाइजेशन के जरिए जलधारा को निर्धारित और सुरक्षित दिशा में प्रवाहित करने की व्यवस्था विकसित की जाएगी। इससे नदी के बहाव को अधिक व्यवस्थित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
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रात में ही सक्रिय हो गया था प्रशासन

तटबंध कटान की जानकारी मिलते ही मुख्यमंत्री ने सोमवार देर रात मंडलायुक्त, एडीजी जोन समेत वरिष्ठ अधिकारियों को तत्काल मौके पर पहुंचने और राहत-बचाव की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद मंगलवार को मुख्यमंत्री स्वयं प्रभावित क्षेत्र में पहुंचे और तटबंध की स्थिति के साथ बाढ़ प्रभावित इलाकों का जायजा लिया।

5.5 लाख क्यूसेक के उफान ने बढ़ाई चिंता

नारायणी में सामान्य तौर पर तीन से चार लाख क्यूसेक के आसपास रहने वाला जलप्रवाह इस बार बढ़कर करीब 5.5 लाख क्यूसेक तक पहुंच गया। प्रदेश के विभिन्न हिस्सों के साथ नेपाल और देश के अन्य क्षेत्रों में हुई भारी बारिश को जलप्रवाह बढ़ने की प्रमुख वजह बताया गया। इतनी बड़ी मात्रा में पानी आने से नदी और तटबंधों पर दबाव बढ़ा, जिसके चलते तटबंध क्षतिग्रस्त हुए और कई गांवों में जलभराव की स्थिति बनी।
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