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Kushinagar News: बांध टूटा, गांव उजड़ा..फिर जर्जर बांध पर आ बसी बेबस जिंदगी

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एपी तटबंध पर अहिरौली दान ढाला के समीप तिरपाल लगाने की जद्दोजहद करता व्य​क्ति।स्रोत-सोशल मीडिया
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कुशीनगर। एपी बांध जिसकी सड़क तो जर्जर है ही व्यवस्था और इसका रखरखाव ऐसा जर्जर रहा कि बांध टूटा। गांव में पानी घुसा तो घर छूटा, घर छूटा तो वही बांध फिर सहारा बना। लेकिन जिस बांध पर बाढ़ से विस्थापित होकर लोग आकर टिके हैं, उसकी सड़क और वह बांध खुद बदहाली की कहानी कह रही है।
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दानचक, बाघखास, बाघाचौर से होते हुए विरवट कोन्हवलिया तक एपी तटबंध की सड़क जगह-जगह जर्जर है। इसके आगे भी चैन पट्टी, जवही दयाल और जंगली पट्टी तक यही हाल है। शुक्रवार को दानचक के पास तटबंध क्षतिग्रस्त हुआ था। इससे पहले गौरहा के सामने और जवही दयाल-विरवट कोन्हवलिया के बीच तटबंध टूट चुका है। इन कटान स्थलों के बीच गुजरती सड़क पर अब बाढ़ से विस्थापित परिवारों की जिंदगी और भारी वाहनों की आवाजाही एक साथ चल रही है। एक तरफ टूटे गांव हैं, दूसरी तरफ टूटी सड़क और बीच में तिरपाल के नीचे बेबस लोग। अहिरौलीदान से टूटे तटबंध वाले विरवट कोन्हवलिया क्षेत्र की दूरी करीब छह किलोमीटर है।
दानचक से आगे अहिरौलीदान चौक होते हुए सिसवा नाहर की ओर जाने वाला रास्ता भी इसी क्षेत्र से जुड़ता है। कुछ दूरी तक जितेंद्र के घर के आसपास पक्की सड़क दिखाई देती है लेकिन आगे सड़क की हालत बदल जाती है। बांध की सड़क पर गड्ढे, उखड़ी सतह और कीचड़ के बीच अब बाढ़ प्रभावित परिवारों का आवागमन भी है और राहत-बचाव में लगे वाहनों की आवाजाही भी।
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बाघाचौर के झवनिया टोला में बाढ़ का पानी पहुंचने के बाद कई परिवार बांध पर आ गए हैं। शनिवार दोपहर करीब एक बजे मंजू देवी, निर्मला देवी, रवीता देवी और उषा देवी बांध पर बैठकर आपस में बात कर रही थीं और साथ में छोटे-छोटे बच्चों को संभाल रही थीं। गांव और घर छोड़ने का दर्द पूछने पर कुछ देर के लिए उनकी आंखें ही जवाब बन गईं। संवाद
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