कुशीनगर। निजी अस्पतालों के बोर्ड पर नामी डाॅक्टरों का नाम दर्ज हैं लेकिन मरीजों का इलाज नीम हकीम कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम की जांच में इसकी पुष्टि हुई है। जिन डाॅक्टरों के नाम पर निजी अस्पतालों का पंजीकरण हुआ है, वे मौके पर नहीं कमी रहे हैं।
सोमवार को जांच के दौरान 30 अस्पतालों में पंजीकृत डाॅक्टरों का पता नहीं था। स्वास्थ्य विभाग में तीन सर्जन समेत दस ऐसे डाक्टरों की सूची तैयार की है। इन डाक्टरों को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा जाएगा,संतोषजनक जवाब नहीं देने पर इनके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। इस कार्रवाई के बाद जिम्मेदारों की आंखों में धूल झोंक कर अस्पताल संचालित करने वाले संचालकों में खलबली मची है।
जिले के निजी अस्पतालों में मरीजों की मौत के बाद हंगामा की गई घटनाएं सामने आई। जांच में स्वास्थ्य विभाग के नोडल अफसर रहे डॉ. आरडी कुशवाहा ने कार्रवाई के नाम पर खानापूरी कर क्लीनचिट दे दी। डीएम महेंद्र सिंह तंवर ने इसको गंभीरता से लिया और सीएमओ कार्यालय के कुछ कर्मचारियों को चेतावनी दी। सीएमओ को अस्पतालों की जांच के निर्देश दिए। सोमवार को आठ टीमों ने पंजीकृत 52 निजी अस्पतालों की जांच की। अधिकतर अस्पताल मानक के अनुसार नहीं मिले। डाक्टरों के मोबाइल पर फोन करने पर फोन रिसीव नहीं हुआ। जांच में प्रथम दृष्टया पता चला कि बोर्ड पर नामी डाक्टरों का नाम है लेकिन पंजीकरण दूसरे डाक्टर के नाम पर है। वह भी मौके पर नहीं आते हैं।
छावनी में संचालित एक निजी अस्पताल पर स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंची तो डाक्टर नहीं मिले, कुछ देर बाद संचालक एक महिला डाक्टर को लाकर टीम के सामने खड़ा कर दिया। टीम ने एमबीबीएस की पढ़ाई के बारे में पूछताछ की तो कुछ देर चुप रही, फिर घबराहट होने की बात कह कर चली गईं। इसके बाद संचालक ने कहा कि तबीयत ठीक नहीं है।
निजी अस्पतालों पर कई संचालक भी डिग्री के साथ अपना नाम लिखवा रखे हैं, जबकि उनके अस्पताल का रजिस्ट्रेशन दूसरे डाक्टर के नाम पर है। सूत्रों ने बताया कि सीएमओ कार्यालय में तैनात कुछ स्वास्थ्यकर्मियों की शह पर इस खेल को अंजाम दिया जा जा रहा है। पूर्व में भी बोर्ड पर नामी डॉक्टरों का नाम लिखवाकर नीम हकीम से इलाज कराने का मामला पकड़ा जा चुका है।