हाई वोल्टेज करंट की चपेट से टेक्नीशियन झुलसा
जिला अस्पताल में चल रहा इलाज, एक दूसरे पर लापरवाही का आरोप
निर्माणाधीन अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट कुशीनगर के टर्मिनल बिल्डिंग में चल रहा है काम
अमर उजाला ब्यूरो
कसया(कुशीनगर)। निर्माणाधीन अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट कुशीनगर के टर्मिनल बिल्डिंग में रविवार की देर रात कार्य के दौरान एक टेक्नीशियन हाई वोल्टेज करंट की चपेट में आकर झुलस गया जिसका इलाज जिला अस्पताल में चल रहा है। वहीं, घटना के बाद बिजली निगम व कार्यदायी संस्था के अफसर एक दूसरे पर लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं।
निर्माणाधीन एयरपोर्ट के पुराने टर्मिनल बिल्डिंग को अपग्रेड करने का काम चल रहा है। यहां फरीदाबाद निवासी टेक्नीशियन विधिचंद (20) रविवार की देर रात 10 मजदूरों के साथ एसी व सीसीटीवी कैमरा लगाने का काम कर रहा था। इसी बीच टर्मिनल बिल्डिंग में विद्युत आपूर्ति के लिए लगा केबिल टूटकर गिर गया। इस दौरान हाई वोल्टेज की धारा प्रवाहित होने से काम कर रहा टेक्नीशियन विधिचंद करंट की चपेट में आकर झुलस गया। आनन-फानन में उसे सीएचसी कसया ले जाया गया, जहां डाक्टर ने प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। इलाज के बाद हालत में सुधार होना बताया जा रहा है। इस घटना के बाद सोमवार को मजदूरों ने बिना सुरक्षा उपाय हुए काम करने से मना कर दिया। काफी मान मनौव्वल के बाद मजदूर मंगलवार से काम करने को तैयार हुए।
उधर, घटना को लेकर बिजली निगम व एयरपोर्ट पर बिजली का काम करा रही कार्यदायी संस्था के अफसरों में आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गया है। बिजली निगम के एसडीओ अवनीश श्रीवास्तव का कहना है कि तार जोड़ने के लिए रात में ही विद्युत कर्मियों को मौके पर भेजा गया था लेकिन प्रोजेक्ट इंजीनियर के विरोध के चलते कर्मचारी वापस लौट आए। सोमवार दोपहर बाद इसे ठीक कराया गया। प्रोजेक्ट इंजीनियर सुनील तिवारी का कहना है कि घटना के बाद जेई फोन नहीं उठा रहे थे और एक्सईएन तत्काल कार्रवाई की बजाय कनेक्शन, बिल आदि की बात कहने लगे। इसके बाद अधीक्षण अभियंता को बताया गया तब जाकर सप्लाई बंद हुई। इसके चलते करीब तीन लाख के उपकरण जल गए।
एयरपोर्ट अथारिटी ने नहीं लिया कनेक्शन : एक्सईएन
एक्सईएन चंद्रबली ने कहा कि अब तक एयरपोर्ट अथारिटी ने कनेक्शन नहीं लिया है। इसके बावजूद विद्युत निगम पूरा सहयोग कर रहा है। कम क्षमता के ट्रांसफार्मर व केबिल से अधिक लोड दिए जाने के चलते तार गलकर नीचे गिरा है। कार्यदायी संस्था ने सुरक्षा के लिए प्रोजेक्ट यूनिट भी नहीं लगाई है।