चेपुआ मछली की कृत्रिम ब्रीडिंग पर शोध के लिए पहुंची टीम
छितौनी (कुशीनगर)। गंडक नदी में पाई जाने वाली खास मछली चेपुआ की इंटरनेशनल ब्रांडिंग के लिए कवायद शुरू हो गई है। खड्डा के विधायक जटाशंकर त्रिपाठी की पहल पर नेशनल ब्यूरो ऑफ जेनेटिक रिसोर्सेज (एनबीएफजीआर) लखनऊ के वैज्ञानिकों की तीन सदस्यीय टीम ने शुक्रवार को गंडक नदी के पनियहवा घाट पर पहुंचकर पानी का नमूना लिया।
टीम वाल्मीकिनगर बैराज तक पानी के नमूने एकत्रित करेगी। टीम चार दिन तक यहां रुककर चेपुआ मछली की प्रकृति समेत इसकी कृत्रिम ब्रीडिंग की संभावनाएं तलाशेगी। गंडक नदी में पाई जाने वाली चेपुआ मछली की स्थानीय स्तर पर बहुत मांग रहती है। पनियहवा में दर्जन भर से अधिक दुकानों पर ऐसी मछली फ्राई करके बेंची जाती है। दूर-दूर से लोग यहां चेपुआ खाने के लिए आते हैं। खड्डा विधायक जटाशंकर त्रिपाठी ने इस मछली को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने के लिए प्रयास शुरू किया है। विधायक के पत्र पर शुक्रवार को प्रधान वैज्ञानिक डॉ केडी जोशी की टीम ने चेपुआ मछली के रहन-सहन का जायजा लिया। इस दौरान टीम के सदस्यों ने गंडक नदी के पानी का सैंपल लिया तथा जल मापक मशीन से पानी की गुणवत्ता नापी।
प्रधान वैज्ञानिक ने बताया कि पहले इस बात की जांच की जा रही है कि आखिर क्यों केवल गंडक में ही चेपुआ मछली पाई जाती है। इसके लिए नदी की जल की मिठास तथा उसकी गुणवत्ता देखी जा रही है। इसके अलावा चेपुआ के जीवन विस्तार का भी अध्ययन किया जा रहा है। इस दौरान वैज्ञानिकों की टीम ने मछुआरों से नदी तथा चेपुआ मछली के प्रजनन की जानकारी ली। बताया गया कि चेपुआ मछली का प्रजनन काल नवंबर से लेकर फरवरी मार्च तक होता है। यह मछली छह से सात हजार तक अंडे देती है। स्थानीय मछुआरों ने बताया कि सामान्यतया इस मछली की लंबाई छह से सात इंच होती है तथा वह अंडा नदी के अंदर मौजूद हरी घास पर देती है।
इस दौरान मौजूद खड्डा विधायक जटाशंकर त्रिपाठी ने कहा कि स्थानीय स्तर की खूबियों को आगे बढ़ाकर देश को आत्मनिर्भर बनाने का सपना प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री का है। पनियहवा के चेपुआ मछली की ग्लोबल मार्केटिंग इसी सपने का एक हिस्सा है। दुनिया के 40 बौद्घिस्ट देशों को वहां के दूतावास के माध्यम से कुशीनगर के अलावा पनियहवा की भी जानकारी देने के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है। अगर ऐसा संभव हुआ तो कुशीनगर आने वालों पर्यटक आसानी से पनियहवा पहुंचकर चेपुआ मछली व गंडक नदी का आनंद ले सकेंगे।
वैज्ञानिकों की टीम में प्रधान वैज्ञानिक डॉ. केडी जोशी, मुख्य तकनीक अधिकारी डॉ. राजेश दयाल, सहायक मुख्य तकनीक अधिकारी डॉ अजय कुमार आदि मौजूद रहे।