पदोन्नति के बाद होने वाली तैनाती के लिए विकल्प भरने के लिए दिन भर डॉयट पर जमे रहे शिक्षकों का धैर्य शाम को टूट गया। नाराज शिक्षकों ने बीएसए कार्यालय पहुंचे और अफसरों पर मनमानी का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। शिक्षकों ने एनएच भी जाम करने का प्रयास किया लेकिन वहां मौजूद पुलिस वालों ने समझा बुझाकर वापस उन्हें बीएसए कार्यालय भेज दिया। देर शाम तक बंद कमरे में शिक्षक प्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच वार्ता चल रही थी।
जिले के 104 सहायक अध्यापकों को प्रथम पदोन्नति मिलनी है। इसके लिए काउंसिलिंग हो चुकी है। बुधवार को इन शिक्षकों से स्कूलों का विकल्प लिया जाना था, परंतु कुछ ही विद्यालयों की सूची प्रकाशित करने से नाराज शिक्षकों ने डॉयट में धरना दिया था। बीएसए ने बृहस्पतिवार को नई सूची जारी कराते हुए विकल्प भरवाने का आश्वासन दिया था। बृहस्पतिवार को भी ये शिक्षक डॉयट पहुंचे लेकिन वहां विभाग की तरफ से कोई जिम्मेदार नहीं पहुंचा। दोपहर बाद तीन बजे आक्रोशित शिक्षक बीएसए दफ्तर पहुंचे और हंगामा करने लगे। शिक्षकों ने बीएसए समेत अन्य अधिकारियों के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। इसके बाद बीएसए दफ्तर के सामने पडरौना-कसया मार्ग (एनएच 28 बी) को जाम करने का प्रयास किया। मौके पर मौजूद चौकी इंचार्ज शेष बहादुर ने सभी को समझाकर सड़क से हटाया। हंगामा बढ़ता देख बीएसए ने खुद लेखाधिकारी के कमरे जाकर अंदर से कमरा बंद कर लिया। वहां तक पहुंचे शिक्षक बाहर से कमरे का दरवाजा पीटने लगे। इसकी जानकारी पर पडरौना के कोतवाल राय साहब यादव मय फोर्स वहां पहुंचे और आंदोलित शिक्षकों को कमरे से बाहर निकाला। कोतवाल ने बीएसए और शिक्षकों के बीच वार्ता की पेशकश रखी। शिक्षकों की तरफ से विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के महामंत्री राजेश शुक्ल और सुमित त्रिपाठी सहित पांच शिक्षक वार्ता के लिए गए। परंतु बीएसए ने शासन से मिले नए दिशा निर्देशों का हवाला देकर मामला टाल दिया। इसके बाद भी शिक्षक बीएसए कार्यालय पर जमे हुए हैं।
इस दौरान आभा राय, अर्चना देवी, श्वेता पाठक, प्रभात चतुर्वेदी, आशुतोष शुक्ल, अजय सिंह, विनोद कुमार, राजन कुमार, दशरथ वर्मा, प्रभाकर यादव आदि मौजूद रहे ।