शहर के सबसे प्रतिष्ठित महाविद्यालय यूएनपीजी कॉलेज में शिक्षकों की कमी विद्यार्थियों पर भारी पड़ रही है। स्थिति यह है कि यहां 49 शिक्षकों के स्थान पर केवल 10 ही कार्यरत हैं। विज्ञान वर्ग में मात्र एक स्थायी शिक्षक के भरोसे कार्य चल रहा है। कमी को दूर करने के लिए 24 शिक्षकों को मानदेय पर रखा गया है। शिक्षकों की कमी के चलते पाठ्यक्रम भी समय से पूर्ण कराने में दिक्कत आ रही है।
पडरौना राज दरबार की तरफ से 70 के दशक में इस शहर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए उदित नारायण स्नातकोत्तर महाविद्यालय की स्थापना की गई थी। अनुशासन और गुणवत्तायुक्त शिक्षण के चलते इस कॉलेज में पड़ोसी प्रांत बिहार के भी विद्यार्थी दाखिला लेने लगे। नकलविहीन परीक्षा के लिए इस कॉलेज की ख्याति गोरखपुर मंडल में रही है। परंतु बीते एक दशक में शिक्षकों के रिटायरमेंट का इस कॉलेज पर गहरा असर पड़ा है। कॉलेज प्रबंधन ने आयोग को पत्र भेजकर शिक्षकों की स्थिति से अवगत कराया। बावजूद इसके पांच शिक्षकों की डिमांड पर कभी दो, कभी एक शिक्षक ही मिले। वर्तमान समय में इस कॉलेज में स्नातक कला वर्ग में कुल 10 विषयों की मान्यता है। स्नातक विज्ञान वर्ग में पांच, स्नातकोत्तर के कला वर्ग में पांच और विज्ञान वर्ग में एक विषय की मान्यता है। चौंकाने वाली बात यह है कि वाणिज्य संकाय में बगैर शिक्षक के ही मान्यता प्राप्त हो गई है। विज्ञान वर्ग में गणित के शिक्षक डॉक्टर गुंजेश्वर शुक्ल के निधन के बाद यह विषय शिक्षकविहीन था। हाल ही में यहां डॉक्टर राणा नूर को तैनात किया गया है। इसके अलावा विज्ञान वर्ग में अन्य कोई टीचर नहीं है। कला वर्ग के समाज शास्त्र विषय के अध्यापक डॉक्टर अनिल कुमार राठी का स्थानांतरण हो जाने के बाद यहां डॉक्टर नरेंद्र कुमार त्रिपाठी को आयोग ने तैनात किया है।
इन विषयों में खाली हैं शिक्षकों का स्थान
इस कॉलेज में अंग्रेजी, संस्कृत, अर्थशास्त्र, मध्यकालीन इतिहास विषय के शिक्षकों के पद रिक्त हैं। विज्ञान वर्ग में वनस्पति विज्ञान, जंतु विज्ञान, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान के लिए स्थायी शिक्षक नहीं हैं। इन विषयों में मानदेय पर शिक्षक रखकर अध्यापन कार्य कराया जाता है।
आयोग को भेजा गया है पत्र : प्राचार्य
यूएनपीजी कॉलेज के प्राचार्य डॉक्टर अयोध्या नाथ त्रिपाठी ने बताया कि जिन विषयों में शिक्षकों के पद रिक्त हैं उनकी तैनाती के लिए आयोग को पुन: पत्र भेजा गया है। उन्होंने बताया कि कार्यभार ग्रहण करते ही मैंने आयोग को शिक्षकों की स्थिति से अवगत करा दिया हैं। कॉलेज में पठन-पाठन सामान्य रूप से चलता रहे, इसके लिए 24 शिक्षक मानदेय पर रखे गए हैं।