- गोविवि : सरकारी आवास में रहते मिले गेस्ट फैकेल्टी टीचर और आउटसोर्सिंग कर्मचारी
-विवि प्रशासन की ओर से गठित टीम के आवासों की जांच के बाद सामने आया मामला
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। गोरखपुर विश्वविद्यालय की शिक्षिका द्वारा आवंटित सरकारी आवास को किराए पर देने का मामला प्रकाश में आया है। यह खुलासा गोविवि प्रशासन द्वारा आवासों के लिए गठित कमेटी की जांच में हुआ है। इसके अलावा शिक्षक और कर्मचारियों के आधा दर्जन सरकारी आवास में गेस्ट फैकेल्टी टीचर और आउटसोर्सिंग कर्मचारी रहते मिले। शुक्रवार को विवि परिसर में इसकी चर्चा पूरे दिन होती रही।
गोरखपुर विश्वविद्यालय में शिक्षक और कर्मचारियों के रहने के लिए हीरापुरी कॉलोनी, गेस्ट हाउस के समीप मुंशी कॉलोनी, कचहरी बस स्टैंड के समीप प्रोफेसर कॉलोनी और याक्ची कंपाउंड व मुख्य परिसर में करीब 200 आवास बने हैं। आवास आवंटित होने पर शिक्षक और कर्मचारी के वेतन से एक निर्धारित रकम की कटौती की जाती है।
पूर्व कुलपति के समय शिक्षकों के कई आवास आउटसोर्सिंग कर्मचारी और गेस्ट फैकेल्टी टीचर को रहने के लिए दे दिया गया था। जिससे विवि को आर्थिक नुकसान भी हो रहा है। इसकी जानकारी होने पर विवि प्रशासन ने जांच के लिए एक कमेटी गठित की।
कमेटी आवास पर पहुंच कर किस आवास में कौन रहा है, किसको आवंटित है और कब से आवंटित है, हाल के दिनों में किसको आवास आवंटित किया गया है आदि की जानकारी जुटा रही है।
कमेटी की जांच में सामने आया कि हीरापुरी कॉलोनी में विश्वविद्यालय की एक शिक्षिका के लिए आवंटित आवास में दूसरा व्यक्ति रहता मिला, जो पेशे से ठेकेदार है। शिक्षिका से इस संबंध में टीम ने जानकारी ली तो उन्होंने अपने भाई के रहने की जानकारी दी। हालांकि कॉलोनी वालों ने टीम को किराएदार होने की जानकारी दी है।
इसके अलावा शिक्षकों के लिए बने आवास में दो गेस्ट फैकेल्टी के टीचर रहते मिले। चारों कॉलोनियों में मिलाकर करीब आधा दर्जन आवास में आउटसोर्सिंग कर्मचारी व गेस्ट फैकेल्टी के टीचर रहते मिले। कमेटी जांच रिपोर्ट तैयार कर विवि प्रशासन को देने की तैयारी कर रही है।
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कोट...
लंबे समय से कुछ शिक्षक आवास की मांग कर रहे हैं, इसके लिए संबंधित विभाग आवासों का सर्वे कर रहा है। अभी रिपोर्ट आई नहीं है। अगर आवंटित आवास किसी और को दिया गया है या अवैध रूप से कोई रहता पाया गया तो आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
- प्रो. शांतनु रस्तोगी, कुलसचिव, गोविवि