- गीता वटिका में आयोजित राधाष्टमी महोत्सव का दूसरा दिन
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। गीता वाटिका में मनाए जा रहे राधाष्टमी महोत्सव के दूसरे दिन पूजन-अर्चन के बाद रासमंडली ने प्रिया-प्रियतम के नित्य रासविहार, मयूर-नृत्य व डांडिया-नृत्य के बाद ‘माखन चोरी लीला’ का मंचन किया जिसे देख दर्शक भावविभोर हो गए। वहीं राधाष्टमी का पर्व शनिवार को मनाया जाएगा।
कलाकारों ने मंचन में दिखाया कि गोपी के यहां से कन्हैया ने अपनी एक टोली तैयार की। इस टोली में सुबल, मंगल, सुमंगल, सुदामा, तोसन आदि सखा शामिल किए। चोर मंडली के अध्यक्ष स्वयं कन्हैया थे। कान्हा अपनी टोली के साथ तैयार हुए और योजना बनाई चिकसोले वाली गोपी के घर माखन चोरी करने की।
कन्हैया और उनकी टोली गोपी के घर पहुंचे। कन्हैया ने गोपी के घर पहुंचकर अपने साथियों को छिपा दिया और स्वयं दरवाजे पर पहुंच कर जोर-जोर से द्वार खटखटाने लगे। जब गोपी ने द्वार खोला, तो कान्हा को खड़े देखकर पूछा कान्हा, सवेरे-सवेरे यहां कैसे? कान्हा बोले, मैया ने भेजा है कि चिकसोले वाली गोपी के घर जाओ। हमारे घर में कोई संत महात्मा आए हैं और अभी घर में ताजा माखन नहीं निकाला है।
मैया ने कहा है कि आप भोर में उठकर माखन निकाल लेती हो, तो एक मटकी माखन दे दो, बदले में दो मटकी माखन लौटा दूंगी। गोपी बोली, कान्हा मैया से कह देना कि लौटाने की जरूरत नहीं है। संतों की सेवा मेरी तरफ से हो जाएगी। गोपी झट से अंदर गई और माखन की मटकी के साथ कान्हा को मिश्री भी दी।
माखन लेकर बाहर आए और जैसे ही गोपी ने द्वार बंद किए कान्हा ने अपने सभी दोस्तों को बुलाया और कहा जिसके यहां चोरी की है उसके दरवाजे पर बैठकर खाने में एक अलग ही आनंद की अनुभूति होती है और फिर यह चोरी नहीं कहलाती। इतना कहते ही सब चिकसोले वाली गोपी के दरवाजे के बाहर बैठ गए।
सभी सखा माखन और मिश्री खाने लगे। माखन मिश्री के खाने की आवाज जब गोपी के कानों में पड़ी, तब उन्हें लगा कहीं घर में बंदर तो नहीं आ गए। गोपी ने जैसे ही दरवाजा खोला उन्हें कान्हा अपनी मित्र मंडली के साथ माखन खाते दिखे।