पडरौना। कभी एनआरएचएम घोटाले में पूछताछ को लेकर तो कभी अपनी कार्यशैली को लेकर कई बार चर्चा में रहे फार्मासिस्ट अशोक यादव को निलंबित कर दिया गया है। साथ ही इन पर लगे आरोपों की जांच चल रही है, हालांकि सीएमओ भी इस बारे में अभी खुलकर बताने की स्थिति में नहीं हैं कि जांच किस बात की करा रहे हैं।
फार्मासिस्ट अशोक यादव की मूल तैनाती तो जिला क्षय रोग अधिकारी के कार्यालय में है, लेकिन अपने प्रभाव और शासन में गहरी पैठ की वजह से वह कई वर्षों से सीएमओ कार्यालय में खुद को संबद्घ कराकर ड्यूटी करते आ रहे हैं। उन पर एनआरएचएम घोटाले के आरोपी रहे तत्कालीन सीएमओ एनआरएचएम का सह आरोपी मानते हुए सीबीआई ने न केवल अपने दफ्तर बुलाकर पूछताछ की थी, बल्कि दो बार गाजियाबाद जेल भी भेजा था। उसके बाद भी उनका निलंबन न करके सीएमओ कार्यालय में औषधि भंडार का काम लिया जाता रहा।
इसकी शिकायत मिलने पर जिले के तत्कालीन प्रभारी मंत्री ने डीएम को जांच कराकर कार्रवाई करने का निर्देश दिया था। डीएम के निर्देश पर सीएमओ ने तत्कालीन डीटीओ डॉ. वीके वर्मा, डिप्टी सीएमओ डॉ. जयनाथ सिंह और डॉ. ताहिर अली की तीन सदस्यीय टीम गठित कर शिकायतकर्ता और आरोपी के पक्षों की जांच की थी। जांच रिपोर्ट डीएम को भेज दी गई थी। उसमें बताया गया था कि मामले की जांच सीबीआई कर रही है। फार्मासिस्ट के आय से अधिक संपत्ति का मामला भी उठा था, जो अभी न्यायालय में विचाराधीन बताया जा रहा है।
इस जांच के बाद सीएमओ ने लिखित तौर पर फार्मासिस्ट की संबद्घता निरस्त कर डीटीओ कार्यालय में ड्यूटी करने का निर्देश दिया था। बावजूद इसके फार्मासिस्ट को ज्यादातर सीएमओ कार्यालय के औषधि भंडार में ही देखा जाता था। इधर, सीएमओ ने फार्मासिस्ट को एक जनवरी की तारीख में निलंबित कर दिया है, जिसकी पुष्टि खुद सीएमओ ने की।
इस संबंध में सीएमओ डॉ. अखिलेश कुमार का कहना था कि फार्मासिस्ट अशोक यादव को एक जनवरी को निलंबित कर दिया गया है। उन पर अपने कार्य में लापरवाही बरतने सहित कई आरोप हैं। सीएमओ का कहना था कि फार्मासिस्ट के मामले में दो-तीन बिंदुओं पर जांच चल रही है। जांच पूरी होने के बाद ही इस बारे में कुछ बता सकेंगे।