पडरौना। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की आने वाली जयंती तक संपूर्ण जनपद को ओडीएफ घोषित करने के इरादे के आगे विभाग से जुड़े कुछ लोग ही दीवार बन गए हैं, क्योंकि अभी भी तीन लाख नौ हजार शौचालय बनवाने बाकी हैं। शौचालयों के निर्माण की सुस्त रफ्तार को देखते हुए छह महीने में लक्ष्य हासिल होना मुश्किल दिख रहा है। ऐसे में 50 से अधिक ग्राम प्रधान चिह्नित किए गए हैं, जिनके गांवों में शौचालयों की स्थिति काफी दयनीय है। ऐसे ग्राम प्रधानों पर कार्रवाई की तलवार कभी भी लटक सकती है।
स्वच्छ भारत मिशन के तहत शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों को साफ सुथरा रखने के लिए केंद्र एवं राज्य सरकार की ओर से काफी जोर दिया जा रहा है। इस वर्ष महात्मा गांधी की जयंती तक सभी गांवों को ओडीएफ (खुले में शौचमुक्त) घोषित कर देना है। इसी उद्देश्य से जनपद में कुल 4.20 लाख शौचालय बनवाए जाने का लक्ष्य रखा गया है, लेकिन इनमें से अब तक 1.11 लाख शौचालय ही बन पाए हैं। अभी भी 3.09 लाख शौचालय छह माह के भीतर बनवाए जाने हैं। इस वित्तीय वर्ष में 83625 शौचालय बनवाने का लक्ष्य पंचायतीराज विभाग को मिला था। यह वित्तीय वर्ष खत्म होने में केवल एक सप्ताह का समय शेष है, लेकिन 65 हजार शौचालय ही बन सके हैं।
02 अक्टूबर 2018 तक कुशीनगर जनपद को ओडीएफ घोषित कर देना है। इसके लिए जिले में कुल 4.20 लाख शौचालय बनवाने का लक्ष्य था, लेकिन अभी तक 1.11 लाख शौचालय ही बन पाए हैं। 50 से अधिक ऐसे ग्राम प्रधान चिह्नित किए गए हैं, जिनके वहां शौचालय की धनराशि भेज दी गई है, फिर भी निर्माण नहीं करा पाए हैं। ऐसे ग्राम प्रधानों के खिलाफ कार्रवाई करने की तैयारी की जा रही है।
राघवेंद्र कुमार द्विवेदी, जिला पंचायत राज अधिकारी।