सोमवार की दोपहर में जौरा बाजार की एक 28 वर्षीय महिला की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। आनन-फानन ससुरालवाले शव को अंतिम संस्कार के लिए लेकर चले गए। मायके पक्ष की सूचना पर शव को कब्जे में लेने गई पुलिस ने गलत फहमी में दूसरे की चिता बुझा दी। बाद में मृतका के भाई ने जब इसकी जानकारी दी तो पुलिस दूसरी चिता के पास पहुंची और शव के बचे हिस्से को सील कराकर थाने लौटी।
रमाशंकर यादव की पत्नी निर्मला देवी की तबियत खराब होने पर घर के लोग उसे लेकर फाजिलनगर सीएचसी पहुंचे। डाक्टरों ने जिला अस्पताल रेफर कर दिया, लेकिन रास्ते में ही निर्मला की मृत्यु हो गई। मायके पक्ष ने मौत पर संदेह जताते हुए पुलिस को सूचना दी। शव को कब्जे में लेने के लिए पुलिसकर्मी त्रिमुहानी घाट पहुंचे और एक जलती चिता पर पानी डालकर शव के बचे हिस्से को सील कराने की प्रक्रिया शुरू कराई। इसी दौरान मृतका के भाई जितेंद्र यादव ने आकर बताया कि उनकी बहन का शव त्रिमुहानी घाट नहीं बल्कि सिसई घाट पर जलाया जा रहा है। जलती चिता को बुझा चुके पुलिसवालों ने पता कराया तो यह चिता महुआपाटन गांव के किसी बूढ़ी महिला की थी, जिसे कुछ देर पहले ही उसके घरवाले जलाकर वहां से लौट चुके थे। जितेंद्र ने बताया कि सिसई में जल रही चिता को उसने बुझा दिया है। इसके बाद पुलिसकर्मी वहां पहुंचे और वहां से शव के बचे हिस्से को सील कराकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
इस संबंध में पटहेरवा एसओ शैलेष सिंह का कहना है कि गलत फहमी के चलते ऐसा हुआ होगा। मायके पक्ष की सूचना पर शव के बचे हिस्से को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। मामले की छानबीन की जा रही है।