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Kushinagar News: चैत्र वरणी मेले में झूला टूटा, 25 घायल, 11 की हालत गंभीर

Fri, 03 Apr 2026 02:51 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
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भैसहा मेले में ध्वस्त पड़ा झूला । संवाद - फोटो : Archive
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खड्डा। क्षेत्र के भैसहां गांव के प्रसिद्ध चैत्रवरणी मेले में लगा झूला बुधवार की रात करीब 12 बजे टूट गया। इसकी चपेट में आने से झूले पर बैठे 25 से अधिक लोग घायल हो गए। मेला परिसर में मौजूद पुलिस कर्मियों ने 15 घायलों को तुर्कहा सीएचसी पहुंचाया। हालत गंभीर देख डॉक्टर ने 11 घायलों को मेडिकल कॉलेज रविंद्रनगर रेफर कर दिया। शेष लोगों को हल्की चोटें आई हैं। हादसे के बाद झूला संचालक कर्मचारियों समेत भाग निकला। पुलिस ने झूला संचालक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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भैसहां में चैत्र पूर्णिमा पर चैत्र वरणी पर्व पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते है। नारायणी में डुबकी लगाकर प्राचीन दुर्गा माता मंदिर में दर्शन-पूजन करते हैं। इस वर्ष भी मेला लगा है। लोगों के मनोरंजन के लिए प्राइवेट संचालकों ने मेले में बड़ा झूला समेत कई इंतजाम किए हैं। बुधवार की रात करीब 12 बजे श्रद्धालु झूले का आनंद ले रहे थे, तभी झूले का पिलर नींव समेत उखड़ गया। झूले का पूरा सिस्टम चरमराकर गिर पड़ा। उस पर बैठे 25 से ज्यादा झूले के नीचे दबकर घायल हो गए। घटना के बाद वहां चीख-पुकार मच गई। मौजूद पुलिस कर्मियों ने झूले में दबे लोगों को निकलवाया। 15 घायलों को तुर्कहा सीएचसी भेजा गया।
प्राथमिक उपचार के बाद बैजू गुप्ता (25), लालू गुप्ता (22), गिरिजा देवी (35), सृष्टि (01), मीरा यादव (18), सोनी यादव (28), रोहित राव (22), विष्णु साहनी (28), पूनम रानी (25), रम्भा (45), सोनी यादव (25) की हालत गंभीर देख डॉक्टर ने मेडिकल कॉलेज रविंद्रनगर रेफर कर दिया। सीएचसी में अमन (20), खुशबू (22), गिरधारी (50) और शांति (48) का इलाज चल रहा है। करीब 10 लोगों को हल्की चोटें आई थीं। थानाध्यक्ष संदीप सिंह ने बताया कि झूले की नींव उखड़ जाने से हादसा हुआ। सभी घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। झूला मालिक के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर अन्य विधिक कार्रवाई चल रही है।
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दूसरे चक्कर में में ही टूट गया झूला
मेला घूमने आए थे। झूला झूलने का मन हुआ तो काउंटर से 50 रुपये में टिकट लिया और झूले पर बैठ गए। एक सीट पर तीन-तीन लोग बैठे थे। पहला चक्कर घूमने के बाद दूसरे चक्कर में झूला अभी घूम ही रहा था कि धड़ाम की आवाज हुई। इसके बाद लोहे का पूरा झूला नीचे गिर गया। इसकी चपेट में आने से उन्हें हल्की चोट आई है। -सुनील गौतम, निवासी लक्ष्मीपुर, पड़रहवा।

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बड़ा ही भयावह दृश्य था। दबे हुए लोग मदद की गुहार लगा रहे थे। बच्चे व महिलाएं चीख रही थीं। आसपास मौजूद लोग दौड़े। पुलिस वाले भी आ गए। झूले के नीचे दबे लोगों को बाहर निकाला गया। अब भी वह दृश्य आंखों के सामने घूम रहा है। - मगन गौतम, निवासी, रामकोला।

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झूला संचालक ने प्रशासन से नहीं ली थी अनुमति
खड्डा। मेला में झूला लगाने के लिए संचालक ने प्रशासन से अनुमति नहीं ली थी। लोगों का कहना है कि कई दिन से मेले की तैयारियां चल रही थीं। यदि प्रशासन ने पहले ही इसका संज्ञान लिया होता तो इतना बड़ा हादसा नहीं होता। अब खड्डा एसडीएम जांच की बात कह पल्ला झाड़ते नजर आ रहे हैं।

भैसहा गांव में आयोजित मेले में लगा झूला कोई छोटा झूला नहीं था। इसको मेला परिसर में लगाने में कई दिन का समय लगा था। गांव के एक व्यक्ति की जमीन पर स्ट्रक्चर खड़ा किया गया था। झूला लगाने के दौरान तहसील और पुलिस प्रशासन ने यह जानने की कोशिश नहीं की कि सुरक्षा मानकों को पूरा किया जा रहा है या नहीं। बिना प्रशासन की अनुमति के ही झूला लगा दिया गया था।
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यह है नियम
मेला या सार्वजनिक स्थानों पर झूला लगाने के लिए डीएम/एसडीएम की अनुमति अनिवार्य है। साथ ही पुलिस और अग्निशमन विभाग से भी एनओसी लेना होता है। लोक निर्माण विभाग की तरफ से स्ट्रक्चरल सेफ्टी प्रमाणपत्र, विद्युत निरीक्षक की तरफ से वायरिंग जांच, थर्ड पार्टी इंश्योरेंस, फर्स्ट एड किट आदि का होना जरूरी है। झूले के पास हिंदी में सुरक्षा निर्देश लिखा बोर्ड लगाने के साथ ही आसपास कोई बाधा नहीं होनी चाहिए। इसके अतिरिक्त तमाम नियमों का पालन करना या कराना अनिवार्य है, लेकिन झूला लगाने के दौरान इन किसी भी नियम का पालन नहीं किया गया।

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वर्जन

मेला परिसर में झूला लगाने के लिए कोई अनुमति नहीं ली गई थी। इसकी जांच कराई जा रही है। जांच में दोषी लोगों पर विधिक कार्रवाई की जाएगी। -रामवीर सिंह, एसडीएम खड्डा

भैसहा मेले में ध्वस्त पड़ा झूला । संवाद- फोटो : Archive

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