पडरौना। प्रदेश के तमाम जिलों में मिल रहे स्वाइन फ्लू (एच एन 1) के मरीजों को बाद स्वास्थ्य महकमे ने सतर्कता बढ़ा दी है लेकिन जांच का इंतजाम नहीं हो पाया है। मेडिकल कॉलेज में जांच की जानी है लेकिन किट उपलब्ध नहीं कराई गई है। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि इससे निपटने के लिए सभी सीएचसी और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों मेें आइसोलेशन वार्ड बना दिए गए हैं। ओपीडी में आने वाले संभावित मरीजों की सूची शासन को भेजी जा रही है। जिले में कहीं भी स्वाइन फ्लू जांच की सुविधा नहीं है। डाॅक्टर लक्षणों के आधार पर इलाज कर रहे हैं।
मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन, ईएनटी और पीडियाट्रिक्स विभाग में रोजाना 500 से 650 मरीज पहुंच रहे हैं। करीब 40-45 फीसदी मरीज सर्दी, जुकाम, तेज बुखार और सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण वाले मिल रहे हैं। इलाज के साथ ऐसे मरीजों की सूची भी तैयार की जा रही है लेकिन किट उपलब्ध नहीं होने से स्वाइन फ्लू की जांच नहीं हो पा रही है। यही हाल सीएचसी व पीएचसी का भी हैं। लक्षण के मुताबिक मरीजों का इलाज किया जा रहा है।
0
मेडिकल कॉलेज में संभावित लक्षण वाले मरीजों की सूची बनाई जा रही है। जांच किट की उपलब्धता और जल्द जांच शुरू कराने के लिए विभागीय स्तर पर प्रयास किया जा रहा है।किट उपलब्ध होते ही जांच शुरू हो जाएगी। 10 बेड के आइसोलेशन वार्ड में डेंगू सहित वायरल से संबंधित गंभीर मरीजों का इलाज किया जा रहा है। -डॉ. दिलीप कुमार, सीएमएस, मेडिकल कॉलेज, कुशीनगर
0
स्वाइन फ्लू के प्रमुख लक्षण:-
-अचानक तेज बुखार और ठंड लगना।
-लगातार खांसी और गले में खरास।
-सिरदर्द, मांसपेशियों और शरीर में तेज दर्द।
-सांस फूलना और सांस लेने में तकलीफ।
00000
...जब मोबाइल की रोशनी बनी सहारा
पडरौना। मेडिकल कॉलेज कुशीनगर में शनिवार को इलाज कराने के लिए आए मरीज और तीमारदार मोबाइल की रोशनी में भटकते रहे। इसकी वजह हर दो मिनट पर बिजली का गगुल होना रहा। मरीज और तीमारदारों को दवा वितरण काउंटर से लेकर पैथोलॉजी तक मोबाइल की रोशनी का सहारा लेना पड़ा। इस कुप्रबंधन के चलते पुरानी बिल्डिंग की गैलरी से जांच और दवा के लिए अंधेरे से होकर मरीज व तीमारदार आवाजाही करते रहे लेकिन जिम्मेदार बेपरवाह थे। संवाद