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Kushinagar News: आपूर्ति वही, लेकिन सिलिंडर की दिक्कत नहीं हो रही सामान्य

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दुकान में रखा इले​​क्टि्रक सामान और इंडक्शन चूल्हा घर ले जाते लोग। संवाद - फोटो : संवाद
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संतकबीरनगर। खाड़ी देशों में युद्ध के बाद शुरू हुई गैस की किल्लत खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। आलम यह है कि उपभोक्ताओं की संख्या और आपूर्ति में ज्यादा अंतर नहीं है, फिर भी दिक्कत ऐसी है कि समाप्त नहीं हो रही है। वहीं रसोई गैस बुकिंग की अनिवार्यता ने समस्या को और बढ़ा दिया है।
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धनघटा रोड पर रसोई गैस की तलाश में निकले नवीन मंडी रोड निवासी संजय ने बताया कि कई दिनों से सिलिंडर के लिए परेशान हूं, लेकिन अभी तक नहीं मिल सका है। समय माता मंदिर रोड पर कपड़े की दुकान चलाने वाले प्रिंस ने कहा कि इस समय गैस की दिक्कत ज्यादा है। मोहल्लों में हाॅकर भी आने कम हो गए हैं। इस कारण परेशानी और बढ़ गई है। शहर के ही रहने वाले अनीस ने बताया कि गैस की दिक्कत पखवाड़े भर से बनी है। इसका प्रशासन को समाधान करना चाहिए, ताकि पूर्व की तरह गैस मिल सके।
बता दें कि जनपद में उज्ज्वला सहित कुल उपभोक्ताओं की संख्या चार लाख 79 हजार 314 है। इसके सापेक्ष 15885 प्रतिदिन रसोई गैस की आपूर्ति होती है। महीने में इसकी कुल संख्या चार लाख 76 हजार 550 होती है। इस लिहाज से आपूर्ति ज्यादा कम नहीं है, लेकिन फिर भी परेशानी खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। विभाग के मुताबिक सिलिंडर की यही आपूर्ति रोज हो रही, परंतु उपभोक्ता अफवाहों को सुनकर गैस के लिए परेशान हैं।
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दरअसल अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने के बाद गैस की किल्लत होने पर लोगों ने एजेंसियों का रुख कर लिया। इस कारण व्यवस्था प्रभावित हो गई, जबकि विभाग का कहना है कि सिलिंडर की आपूर्ति में कोई अंतर नहीं आया है।
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रसोई गैस की किल्लत नवरात्र में बढ़ाएगी परेशानी
रसोई गैस मिलने में रोजाना कठिनाई बढ़ती जा रही है। नवरात्र भी 19 मार्च से शुरू होने वाले हैं। इसमें गैस का खर्च अधिक बढ़ जाएगा। जिस परिवार में एक सिलिंडर एक महीने में खर्च होता था, उस परिवार में 15 से 20 दिन चलना मुश्किल हो जाएगा। खाड़ी देशों में चल रहे युद्ध के संकट के कारण देश में रसोई गैस की उपलब्धता कम हो गई है, जिसका सीधा असर रसोई गैस के उपभोक्ताओं पर पड़ने लगा है।

ग्रामीण क्षेत्र में 45 दिन बाद सिलिंडर दिए जाने की बात एजेंसी संचालक कर रहे हैं। यही हाल रहा तो नवरात्र में लकड़ी का सहारा लेना पड़ेगा।

-प्रदीप कुमार अग्रहरि

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अभी रसोई गैस मिलना मुश्किल हो गया है तो नवरात्र में यह समस्या और कठिन हो जाएगी, जिससे कई तरह की परेशानी का सामना करना पड़ेगा।

-श्रवण कुमार यादव










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नवरात्र में फलाहार आदि अलग बनते हैं, जिससे खर्च भी बढ़ता है। ऐसे में एक महीने भी गैस चलने वाला नहीं है। किस तरह काम चलेगा यह भगवान भरोसे है।

-संदीप कुमार




प्रत्येक परिवार में रसोई गैस की आवश्यकता है। इस पर पूरी इस तरह निर्भर हैं। रसोई गैस न मिलने पर खाना पकाना मुश्किल होगा।
-पराग
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इंडक्शन चूल्हों की मांग बढ़ी, कंपनियों ने खत्म किए ऑफर
संतकबीरनगर/ सेमरियावां। घरेलू गैस की किल्लत के बीच इंडक्शन चूल्हों और उससे जुड़े बर्तनों की मांग बढ़ गई है। हालत यह है कि कई ऑनलाइन कंपनियों ने इंडक्शन चूल्हों पर दिए जा रहे ऑफर भी बंद कर दिए हैं। सेमरियावां, बाघनगर, दुधारा, मूड़ाडीहाबेग, लोहरौली, सेहुड़ा आदि प्रमुख बाजारों में इन दिनों इलेक्ट्रॉनिक कुकिंग उपकरणों की खरीदारी हो रही है। पानी गर्म करने से लेकर खाना बनाने तक के लिए इस्तेमाल होने वाले इंडक्शन चूल्हे, इलेक्ट्रिक केतली, एयर फ्रायर और अन्य उपकरण की बिक्री बढ़ी है। लोग फिलहाल इनका उपयोग भले ही कम कर रहे हों, लेकिन गैस की संभावित कमी के डर से एहतियात के तौर पर खरीदारी कर रहे हैं।
व्यापारियों के अनुसार, पहले ऑनलाइन कंपनियां इंडक्शन चूल्हों पर 15 से 40 फीसदी तक छूट दे रही थीं, लेकिन मांग बढ़ते ही कई बड़ी कंपनियों ने ये ऑफर बंद कर दिए हैं और अब उत्पाद सीधे एमआरपी पर बेचे जा रहे हैं। बाजारों में ब्रांडेड से लेकर लोकल इंडक्शन चूल्हों की बिक्री तेजी से बढ़ी है। शाहगंज के इलेक्ट्रॉनिक बाजार में भी बड़ी संख्या में लोग नए इंडक्शन खरीदने के साथ पुराने खराब उपकरणों की मरम्मत कराने पहुंच रहे हैं। बाजार में ब्रांडेड इंडक्शन चूल्हे 3500 से 4500 रुपये के बीच मिल रहे हैं, जबकि कुछ हाई-एंड मॉडल 6000 रुपये तक बिक रहे हैं।
इसके साथ ही इंडक्शन पर इस्तेमाल होने वाले कुकर, कढ़ाही और तवे की मांग भी बढ़ गई है। इनकी कीमत 800 रुपये से लेकर 5000 रुपये तक है। कारोबारियों का कहना है कि अगर गैस की किल्लत की स्थिति बनी रही तो आने वाले दिनों में इंडक्शन चूल्हों और संबंधित बर्तनों की मांग और बढ़ सकती है। इलेक्ट्रॉनिक दुकानदार सईदुर्रहमान ने कहा कि घरेलू गैस सिलेंडर की आपूर्ति को लेकर लोगों में चिंता है।
इसी वजह से एहतियात के तौर पर इंडक्शन चूल्हों की खरीदारी बढ़ गई है और बिक्री में काफी इजाफा हुआ है। चूल्हों के साथ उससे जुड़े बर्तनों की मांग भी तेजी से बढ़ी है।

गैस की किल्लत से रोजेदारों की बढ़ी मुश्किलें
रमजान के महीने में एलपीजी गैस की किल्लत के कारण रोजेदारों की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं, जिससे सहरी और इफ्तार की तैयारी में भारी दिक्कतें आ रही हैं। क्षेत्र में सिलिंडर की किल्लत और महंगी कीमतों के चलते लोग परेशान हैं। इस समस्या के पीछे मुख्य कारण मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के कारण आपूर्ति में बाधा आना बताया जा रहा है। गैस की किल्लत से घरों में समय पर खाना पकाने में दिक्कत आ रही है, जिससे रोजा रखने वालों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
पांच दिन में ईद का त्योहार है। ऐसे में रोजेदार सिलिंडर की उपलब्धता को लेकर असमजंस की स्थिति में है। एजेंसियों पर बिना ऑनलाइन बुकिंग के गैस सिलिंडर नहीं मिल रहे हैं। कई दिनों पहले बुकिंग करने वाले उपभोक्ताओं को भी गैस सिलिंडर नहीं मिल रहा है। प्रशासन की ओर से एलपीजी सिलिंडर की कमी की बात को खारिज किया जा रहा है। -

रोजे का समय चल रहा है, लेकिन सिलिंडर की जिस तरह की दिक्कत देखने को मिल रही है। लोग लाइन में खड़े होकर गैस सिलेंडर ले रहे हैं। लोगों को धूप हो छांव उससे कोई फर्क पड़ रहा है।

-इरशाद अहमद, उसराशहीद

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दो दिन से बुकिंग कर रहा था, नहीं हो पा रहा था। एजेंसी पहुंचने पर किसी तरह बुकिंग हुआ है। रमजान के महीने में सुबह सात बजे एजेंसी पर पहुंचने पर ही सिलेंडर मिल सका। सिलेंडर के लिए बहुत परेशानी उठानी पड़ी है।

-कलीम खान, करमा खान
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गैस सिलिंडर के लिए क्षेत्र में परेशानी है। गैस के लिए लंबी लाइन लगानी पड़ रही है। रमजान में खाना पकाने और खाने का एक निश्चित समय है। ऐसे में गैस की किल्लत लोगों की परेशानी बढ़ा दी है।
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-अली अहमद, मदारपुर

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