तमकुहीरोड। सेवरही क्षेत्र में बोई गई गन्ने की फसल पर इन दिनों अंकुर बेधक एवं चोटी बेधक कीटों का प्रकोप बढ़ने लगा है। इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते इन कीटों पर प्रभावी नियंत्रण नहीं किया गया तो गन्ने की पैदावार प्रभावित हो सकती है।
सेवरही क्षेत्र गन्ना उत्पादन के लिए जाना जाता है। यहां हर वर्ष 20 हजार हेक्टेयर से अधिक भूमि में गन्ने की खेती की जाती है। इस समय खेतों में बोया गया गन्ना कहीं डेढ़ फुट तो कहीं दो फुट तक लंबा हो चुका है। गन्ना वैज्ञानिक डॉ. केके साहू ने बताया कि इस माह अंकुर बेधक कीट गन्ने के गोफ में प्रवेश कर मुलायम भाग को नुकसान पहुंचाते हैं। इससे गोफ सूख जाता है और फसल की बढ़वार रुक जाती है। वहीं गन्ना वैज्ञानिक डॉ. केपी सिंह ने बताया कि गन्ने की फसल पर अंकुर बेधक और चोटी बेधक कीटों की पहली पीढ़ी का प्रकोप शुरू हो गया है। उन्होंने बताया कि चोटी बेधक कीट की मादा सलभ सफेद रंग की होती है। इसकी सूंडी गन्ने की पत्तियों को नुकसान पहुंचाते हुए पौधे के शीर्ष भाग को डेड हार्ट अथवा झाड़ीदार संरचना में बदल देती है। उत्तर प्रदेश गन्ना विकास एवं प्रशिक्षण संस्थान पिपराइच के पूर्व सहायक निदेशक ओमप्रकाश गुप्ता ने किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि प्रभावित पौधों को प्यूपा और सूंडी सहित सतह से काटकर नष्ट कर देना चाहिए। साथ ही कीटनाशक दवाओं के घोल का छिड़काव करने से इन कीटों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।