पिपरा बाजार। विशुनपुरा ब्लॉक में सहकारी समितियों के सचिवों की हड़ताल से 50 हजार से अधिक किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। वेतन वृद्धि की मांग को लेकर 36 ग्राम सभाओं की समितियों पर पांच दिन से ताले लटके हैं। इससे रबी की फसलों की बोआई के लिए खाद नहीं मिल पा रही है। बोआई में देरी से उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है।
विशुनपुरा ब्लॉक के 50 हजार से अधिक किसान दोहरी मुसीबत का सामना कर रहे हैं। सितंबर के आखिर और अक्तूबर की शुरुआत में हुई बारिश ने धान की कटाई-मड़ाई बिगाड़ दी। अब बहुउद्देशीय प्राथमिक ग्रामीण सहकारी समितियों की तालाबंदी से रबी की फसलों के लिए उर्वरक का संकट खड़ा हो गया है।
दांदोपुर, सरपतही, माघी मठिया और बलकुड़िया न्याय पंचायतों की समितियों के सचिव वेतन वृद्धि की मांग को लेकर पांच दिनों से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। इससे किसानों को खाद नहीं मिल पा रही है और उनकी उम्मीदें अटक गई हैं। बारिश के कारण निचली जमीन में अब भी नमी है, जिससे धान की पैदावार पर भी असर पड़ा है। किसान किसी तरह खेत तैयार कर आलू, तिलहन और गन्ने की बोआई में जुटे हैं। सामान्य तौर पर इसी दौरान समितियों से उर्वरक उठाया जाता है। समितियों पर ताले लटकने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। बोआई में और देरी हुई तो उपज और गुणवत्ता प्रभावित होने का खतरा है।
जिले में कुल 145 समितियां और 22 साधन सहकारी संघ संचालित हैं। इनके संचालन के लिए केवल 73 सचिव तैनात हैं। कई सचिवों के पास एक से अधिक समितियों का प्रभार है। आगामी दिसंबर में इनमें से कई सचिव सेवानिवृत्त भी होने वाले हैं। इससे समितियों का संचालन पहले से ही कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा है।