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Kushinagar News: चंद्रमा के शाप मुक्त होने का साक्षी है सोमनाथ मंदिर

Fri, 12 Jun 2026 01:16 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
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लक्ष्मीगंज। पगार छपरा गांव के संकटमोचन मंदिर परिसर में 11 दिवसीय श्री रुद्र महायज्ञ में वृहस्पतिवार को कथा वाचक ने सोमनाथ मंदिर के महात्म की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि सोमनाथ मंदिर चंद्रमा के शाप मुक्त होने का साक्षी है।कथा वाचक पंडित प्रदीप सागर महाराज ने कहा कि चंद्रदेव (सोम) का विवाह प्रजापति दक्ष की 27 कन्याओं से हुआ था। चंद्रमा अपनी पत्नी रोहिणी को सबसे अधिक प्रेम करते थे। इससे नाराज होकर अन्य पत्नियों ने पिता दक्ष से शिकायत की। क्रोधित होकर दक्ष ने चंद्रमा को क्षय (दिन-प्रतिदिन घटने/लुप्त होने) का शाप दे दिया। श्राप के कारण चंद्रदेव की चमक कम होने लगी। इससे चिंतित चंद्रदेव को महर्षि नारद ने प्रभास क्षेत्र (वर्तमान सोमनाथ) में भगवान शिव की आराधना करने का सुझाव दिया। इसके बाद चंद्रदेव ने महामृत्युंजय मंत्र का जाप करते हुए घोर तपस्या की। चंद्रमा की इस भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव प्रकट हुए और उन्हें शाप से मुक्त कर दिया। वरदान स्वरूप शिव ने कहा कि चंद्रमा कृष्ण पक्ष में एक-एक कला घटेगा और शुक्ल पक्ष में फिर से पूर्ण रूप से खिलेगा। उन्होंने कहा कि सोमनाथ मंदिर अत्यंत प्राचीन व ऐतिहासिक है। यह 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रथम ज्योतिर्लिंग माना जाता है। यहां का ज्योतिर्लिंग हवा में लटका है। संवाद
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दिव्य प्रेम का प्रतीक है शिव-पार्वती विवाह

तमकुहीरोड। सेवरही क्षेत्र के मिश्रौली राम-जानकी मंदिर कुटी परिसर में चल रहो सात दिवसीय रुद्र महायज्ञ के चौथे दिन बृहस्पतिवार को कथा वाचक ने शिव-पार्वती विवाह की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि शिव-पार्वती का विवाह दिव्य प्रेम और ब्रह्मांडीय मिलन का प्रतीक है।
कथा वाचक प्रियंका द्विवेदी ने कहा कि देवी सती के त्याग के बाद, पार्वती ने कठोर तपस्या करके भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त किया। इस अलौकिक विवाह में भगवान विष्णु ने भाई का कर्तव्य निभाकर कन्यादान किया था और ब्रह्मा जी ने पुरोहित की भूमिका निभाई थी। कथा का शुभारंभ डॉ. संजय सिंह व ग्राम प्रधान गिरजा देवी ने व्यास पीठ की पूजन कर किया। इस दौरान त्रिलोकी सिंह, सुभाष यादव, अजय यादव, रामाशीष यादव, श्रीकांत उपाध्याय, पूर्व प्रधान शिवनारायण तिवारी, प्रधान विकास गुप्ता, शोभी यादव, प्रधान रामनरेश कुशवाहा आदि मौजूद रहे। संवाद
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श्रद्धालुओं को भक्ति और मर्यादा का दिया संदेश
हाटा। नगर के श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में आयोजित राम कथा के दूसरे दिन कथा व्यास भगवान शरण ने रामचरितमानस के विभिन्न प्रसंगों का वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को भक्ति और मर्यादा का संदेश दिया।
उन्होंने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास ने श्रीरामचरित मानस की रचना भगवान शिव और माता पार्वती की वंदना से आरंभ की। भगवान श्रीराम की कृपा प्राप्त करने के लिए भगवान शंकर की कृपा भी आवश्यक है। कथा के दौरान कथा व्यास ने भरत के त्याग, समर्पण और भाईचारे के आदर्श चरित्र का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भरत ने राजसिंहासन का त्याग कर श्रीराम की चरण पादुकाओं को राजगद्दी पर स्थापित किया, जो उनके अद्वितीय त्याग का प्रतीक है। कथा के दौरान अयोध्यावासियों की प्रभु श्रीराम के प्रति अटूट श्रद्धा और प्रेम का भी वर्णन किया गया। दूसरे दिन की कथा के समापन पर उन्होंने कहा कि श्रीरामचरितमानस जीवन को सही दिशा देने वाला दिव्य ग्रंथ है। इस अवसर पर महंत रामानुजाचार्य ब्रह्मचारी ने पूजन-अर्चन किया। कथा स्थल जय श्रीराम के उद्घोष से गुंजायमान रहा। संवाद
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