पडरौना। नए नियमों व प्रदेश सरकार की पहल के बाद जिला पंचायत अध्यक्ष सहित कुछ जनप्रतिनिधियों और अफसरों ने भी स्वत: अपनी गाड़ी से बत्ती उतार ली है तो सहायक बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी समेत कुछ अभी आदेश के इंतजार में हैं। इन अफसरों का कहना है कि बत्ती लगाने का आदेश लिखित रूप से है, लिहाजा इसे हटाने के लिए भी शासनादेश का इंतजार किया जा रहा है। इसके अलावा जनपद में काली फिल्म वाली गाड़ियां भी धड़ल्ले से दौड़ रही हैं, जबकि वाहनों में काले शीशे लगाना प्रतिबंधित है।
वाहनों पर हूटर, सायरन और बत्तियां स्टेटस सिंबल मानी जाती हैं। सरकारी अफसर हों या सत्ताधारी दलों के जनप्रतिनिधि और प्रमुख पदाधिकारी, उनमें ज्यादातर अपने वाहनों पर नीली-लाल बत्तियां और हूटर-सायरन अनाधिकृत रूप से लगाकर चलने लगते हैं। यहां तक कि बहुत से वाहनमालिक ऐसे होते हैं, जो अपने वाहनों पर काले शीशे लगा लेते हैं, जो नियमसंगत नहीं है, जबकि वाहनों पर हूटर, सायरन, लाल-नीली बत्तियां और काले शीशे लगाना अनाधिकृत व्यक्तियों के लिए प्रतिबंधित है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल के बाद शुक्रवार को सीएम योगी आदित्यनाथ समेत कई मंत्रियों ने अपने वाहनों से हूटर-बत्तियां हटा ली थीं। कुशीनगर जिले में भी शुक्रवार को कसया के एसडीएम, तहसीलदार और नायब तहसीलदार सहित कई अधिकारियों ने अपने वाहनों से नीली बत्ती निकाल लिया था। यह सिलसिला शनिवार को भी जारी रहा। जिला पंचायत अध्यक्ष हरीश राणा ने अपनी गाड़ी से लालबत्ती खुद ही हटा ली। इसके अलावा वाहनों में काले शीशे लगाना भी प्रतिबंधित है। क्योंकि बढ़ती अपराधिक घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए वाहनों में पारदर्शी शीशे न लगाने का शासन और सुप्रीमकोर्ट की तरफ से फरमान है, लेकिन परिवहन विभाग की तरफ से इस आदेश का पालन न कराए जाने के कारण काली फिल्म लगी गाड़ियां भी सड़कों पर खूब फर्राटा भरती हैं।