कोयला की अंगीठी पर चाय बनते दुकानदार।संवाद
पडरौना। घरेलू व व्यावसायिक गैस आपूर्ति में कमी का असर लकड़ी व कोयला के दाम पर पड़ा है। गैस की किल्लत के चलते लकड़ी और कोयला की खपत में इजाफा होने से कीमत में भी वृद्धि हुई है। कोयले की कीमत में प्रति किलोग्राम दो रुपये तो वहीं लकड़ी की कीमत में प्रति क्विंटल 200 रुपये का इजाफा हुआ है।
28 फरवरी से पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और ऊर्जा संकट के बीच कोयला और लकड़ी के दामों में वृद्धि दर्ज हुई है। ढाबों, रेस्टोरेंट, होटल व छोटे प्रतिष्ठान पर व्यावसायिक सिलिंडरों की आपूर्ति बंद होने से उनके पास विकल्प के तौर पर सिर्फ कोयला व लकड़ी है। अधिकतर प्रतिष्ठानों ने व्यंजन बनाने के लिए भट्ठियां तैयार कर कोयले का इस्तेमाल कर रहे हैं। वहीं, गांवों में गैस नहीं मिलने से लोग चूल्हों पर लकड़ी से ही भोजन पका रहे हैं। इसका नतीजा है कि पहले कोयला 14 रुपये प्रति किलोग्राम था, अब बढ़कर वह 16 रुपये हो गया है। वहीं, लकड़ी प्रति क्विंटल 500 रुपये से बढ़कर 700 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई है।
पडरौना शहर के कोयला कारोबारी मिथिलेश बंका व संदीप बंका ने बताया कि गैस की किल्लत से शुरूआत में तो कोई असर नहीं था। बीते एक सप्ताह से कोयले की तीन गुना खपत बढ़ी है। इसके चलते कीमत में करीब दो रुपये की वृद्धि हुई है। इसके बावजूद खपत में इजाफा दर्ज हुआ है। कहा कि अगर गैस की किल्लत व पश्चिम एशिया संघर्ष चलता रहा तो इसका असर कोयले की कीमत पर पड़ेगा। दूसरे देशों से भी कोयले का आयात किया जाता है। वर्तमान में स्टॉक है, लेकिन ऐसे चलते रहा तो स्टॉक खत्म होने के बाद दिक्कत हो सकती है।ा
कोयला की अंगीठी पर चाय बनते दुकानदार।संवाद
कोयला की अंगीठी पर चाय बनते दुकानदार।संवाद