सेवरही व खड्डा चीनी मिल ने एक माह से नहीं किया भुगतान, कप्तानगंज का पूरा बकाया
लग्न शुरू होने के बाद किसानों के सामने बेटे-बेटियों की शादी की चिंता
जिले की पांच चीनी मिलों पर नए सत्र में भी बकाया है गन्ना मूल्य
सिर्फ ढाढ़ा और रामकोला चीनी मिल के भुगतान की स्थिति बेहतर
कुशीनगर। लग्न शुरू हो चुका है। बहुत से किसानों के घरों में बेटे-बेटियों की शादी है तो किसी को परिवार के सदस्यों का इलाज कराना है। परिवार के भरण-पोषण से लगायत बच्चों की पढ़ाई के लिए भी किसान गन्ना मूल्य भुगतान पर निर्भर रहते हैं। क्योंकि जनपद के गन्ना किसानों के लिए यही उनकी नकदी फसल है। भुगतान समय पर न होने से किसानों की चिंता बनी हुई है। वजह यह है कि जिले की पांच चीनी मिलों में से ढाढ़ा और रामकोला ने ही जनवरी में भुगतान किया है। सेवरही और खड्डा चीनी मिल ने एक माह से भुगतान नहीं किया है। जबकि कप्तानगंज चीनी मिल ने तो एक रुपये भी किसानों के खाते में नहीं भेजा है। किसानों को अभी भी 54 करोड़ 34 लाख 68 हजार रुपये गन्ना मूल्य पाना है।
जनपद की गन्ना प्रमुख नकदी फसल है। इस साल यहां के किसानों ने करीब 90 हजार हेक्टेयर में गन्ना की खेती की थी। यहां का गन्ना जनपद की सभी पांच चीनी मिलों के अलावा पिपराइच और बिहार के गोपालगंज चीनी मिल तक भेजी जाती है। मौजूदा पेराई सत्र में किसानों ने 109.28 लाख क्विंटल गन्ना की आपूर्ति ढाढ़ा, रामकोला, कप्तानगंज, सेवरही और खड्डा चीनी मिल को की है। इसके एवज में चीनी मिलों की तरफ से किसानों को तीन अरब 78 करोड़ 20 लाख 77 हजार रुपये भुगतान करना है, लेकिन अब तक इन मिलों ने दो अरब 29 करोड़ 16 लाख 88 हजार रुपये भुगतान किया है।
अब भी 54 करोड़ 34 लाख 68 हजार रुपये भुगतान करना बाकी है। इन चीनी मिलों में ढाढ़ा मिल ने 14 जनवरी और रामकोला ने 12 जनवरी तक का भुगतान कर दिया है। सेवरही चीनी मिल ने 16 दिसंबर और खड्डा ने 20 दिसंबर तक का भुगतान किया है, लेकिन कप्तानगंज चीनी मिल ने अब तक एक दिन का भी भुगतान नहीं किया है। जबकि ये चीनी मिलें नवंबर से ही पेराई कर रही हैं।
चीनी मिल देय धनराशि- भुगतान
ढाढ़ा 11489.18 9264.50
रामकोला 11913.76 10562.88
कप्तानगंज 4236.08 ...
सेवरही 7270.11 1737.85
खड्डा 2911.64 1351.65
योग 37820.77 22916.68
किसानों ने की बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान करने की मांग
रामकोला क्षेत्र के लालाछपरा निवासी सुरेश पोद्दार ने कहा कि कप्तानगंज चीनी मिल पर बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान मिलने में हर पेराई सत्र में विलंब होता है। न तो मिल प्रशासन ध्यान देता है और न जिला प्रशासन। रामकोला क्षेत्र के विजयपुर निवासी रामनरेश कुशवाहा ने कहा कि किराया देकर गन्ना कप्तानगंज चीनी मिल पर ले गए। चीनी मिल ने अभी पिछले पेराई सत्र का भुगतान नहीं किया है। इस बार का भी बाकी है।
छितौनी निवासी संजय गुप्ता ने कहा कि कप्तानगंज चीनी मिल का क्रय केंद्र क्षेत्र में लगा है। इसलिए किसान इस चीनी मिल को गन्ना देने के लिए विवश हैं, लेकिन भुगतान नहीं मिल रहा है। छितौनी के किसान पप्पू चौरसिया का कहना है कि कप्तानगंज चीनी मिल को 15 ट्रॉली गन्ना की आपूर्ति की है, लेकिन भुगतान बाकी है। मलुकहीं गांव के किसान वृद्धि चंद्र सिंह ने कहा कि कप्तानगंज चीनी मिल पर उन्होंने भी गन्ना बेचा है। एक लाख पचास हजार रुपये पाने हैं। अब तक भुगतान नहीं मिला है। नरहरछपरा निवासी किसान रामनगीना सिंह ने बताया कि उनका गन्ना भी कप्तानगंज चीनी मिल पर जाता है। इस चीनी मिल पर एक लाख रुपये बाकी है। बरडीहा गांव निवासी उमेश प्रसाद ने बताया कि उनका गन्ना पिपराइच चीनी मिल पर जाता है। 29 दिसंबर को गन्ना गिराए हैं, लेकिन भुगतान नहीं मिला है। घोड़ादेऊर निवासी दयासागर पांडेय ने कहा कि पिपराइच चीनी मिल पर वह गन्ना बेचे हैं। 19 दिसंबर को गन्ना गिराए थे, लेकिन भुगतान नहीं हुआ है।