तमकुहीरोड। शरदकालीन गन्ना, गेहूं, चना, मटर, सरसों और आलू की बुवाई से से पहले बीज शोधन जरूरी है। इससे उपज बढ़ाने और रोगों पर प्रभावी नियंत्रण में मदद मिलती है। उपज में 25 प्रतिशत तक की वृद्धि की संभावना रहती है।
गन्ना शोध संस्थान सेवरही के वैज्ञानिक डॉ. वाईपी भारती बताते हैं कि फसलों में रोगों व कीटों का प्रकोप मिट्टी, बीज व वायु के जरिए अधिक होता है। अगर बीज रोगग्रस्त है तो उसका कुप्रभाव वर्तमान व अगली फसल पर भी पड़ता है। संवाद