पडरौना। स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर परिवहन विभाग सख्त है। बिना फिटनेस, बीमा और परमिट के चल रहे स्कूल वाहनों पर कार्रवाई शुरू हो गई है। बिना फिटनेस प्रमाणपत्र के एक भी स्कूल वाहन सड़क पर नहीं चलने पाएगा। पकड़े जाने पर ऐसे वाहनों को सीज किया जाएगा और स्कूल प्रबंधन पर जुर्माना भी लगेगा।
जिले में 1672 स्कूल वाहन संचालित हैं। इनमें से 1557 वाहन परिवहन विभाग के मानकों पर फिट हैं। स्कूल खुलने के साथ ही ओवरलोड और खटारा वाहनों में बच्चों को लाने-ले जाने की शिकायतें बढ़ गई हैं। विभाग ने 15 जून को ही स्कूल प्रबंधनों को नोटिस जारी कर 30 जून तक फिटनेस, बीमा, परमिट और ड्राइवर का सत्यापन पूरा करने का आदेश दिया था। लेकिन, जांच में सामने आया कि शहर में संचालित निजी स्कूलों के 115 वाहनों को फिटनेस प्रमाणपत्र जारी नहीं हुआ है। कुछ स्कूल संचालकों का तर्क है कि वाहन तो ठीक है, बस कागज बनवाना बाकी है। एआरटीओ ने कहा कि कागज के बिना वाहन को फिट नहीं माना जा सकता। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक स्कूल वाहन में सीसीटीवी, स्पीड गवर्नर, महिला अटेंडेंट और बच्चों के लिए क्रॉस बार अनिवार्य है।
0
क्या-क्या अनिवार्य है स्कूल वाहन में:
- वैध फिटनेस सर्टिफिकेट और इंश्योरेंस।
- परमिट पर स्कूल बस लिखा होना।
- स्पीड गवर्नर 40 किमी/घंटे पर लॉक।
- खिड़कियों पर जाली और आपातकालीन दरवाजा।
- ड्राइवर का पुलिस वेरिफिकेशन और पांच साल का लाइसेंस।
- महिला कंडक्टर/अटेंडेंट की तैनाती।
- फर्स्ट एड बॉक्स और फायर सिलिंडर
0
बिना फिटनेस के संचालित वाहनों पर कार्रवाई के लिए 15 दिन तक विशेष अभियान चलाया जाएगा। विभागीय टीम अलग-अलग स्थानों पर जांच करेगी। बिना फिटनेस पकड़े जाने पर वाहन को सीज करने के साथ 10 हजार जुर्माना लगाया जाएगा। अभिभावक बच्चे को ऐसे वाहन में न भेजें, जिसमें फिटनेस स्टिकर और स्कूल का नाम न लिखा हो। बच्चे की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा। -डॉ. दिलीप गुप्ता, एआरटीओ, कुशीनगर