कसया। महापरिनिर्वाण मंदिर में शुक्रवार को वियतनाम से आए 90 सदस्यीय बौद्ध श्रद्धालुओं के दल ने महात्मा बुद्ध की विधि-विधान से पूजा की। श्रद्धालुओं का दल बोधगया से कुशीनगर पहुंचा था। यहां भगवान बुद्ध के महापरिनिर्वाण स्थल पर श्रद्धा अर्पित करने के बाद शाम को लुंबिनी (नेपाल) के लिए रवाना हो गया। महापरिनिर्वाण मंदिर पहुंचने पर श्रद्धालुओं ने सबसे पहले भगवान बुद्ध की लेटी हुई प्रतिमा के समक्ष नमन किया। इसके बाद सभी श्रद्धालुओं ने बुद्ध प्रतिमा पर श्रद्धापूर्वक चीवर अर्पित किया। बौद्ध परंपरा के अनुसार मंत्रोच्चार और प्रार्थना के बीच पूजा-अर्चना संपन्न हुई। नंदिका भिक्षु ने पूजा कराई और महात्मा बुद्ध के उपदेशों का स्मरण कराया। पूजन के दौरान श्रद्धालुओं ने विश्व शांति, मानव कल्याण, सभी प्राणियों के सुख-समृद्धि और आपसी प्रेम व सद्भाव की कामना की। श्रद्धालु काफी देर तक ध्यान और प्रार्थना में लीन रहे। मंदिर परिसर में गूंजते बौद्ध मंत्रों से पूरा वातावरण आध्यात्मिक और शांतिमय बना रहा। श्रद्धालुओं ने महापरिनिर्वाण मंदिर की ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्ता के बारे में जानकारी भी प्राप्त की। उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली पर आकर पूजा करना उनके जीवन का अत्यंत महत्वपूर्ण और सौभाग्यपूर्ण क्षण है। कुशीनगर बौद्ध धर्मावलंबियों की आस्था का प्रमुख केंद्र है, जहां दुनिया के विभिन्न देशों से श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए आते हैं। पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर का भ्रमण किया और स्मृति स्वरूप तस्वीरें भी लीं। इसके बाद पूरा दल अपने अगले पड़ाव लुंबिनी (नेपाल) के लिए रवाना हो गया। विदेशी श्रद्धालुओं के आगमन से मंदिर परिसर में दिनभर चहल-पहल बनी रही।