शिक्षक हैं कम, सिर्फ कहने को चल रही मोहल्ला पाठशाला
- ऑनलाइन पढ़ाई के लिए बने व्हाट्सएप ग्रुप से भी बड़ी संख्या में बच्चे नहीं जुड़े
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। नगर में संचालित परिषदीय विद्यालयों में नामांकित विद्यार्थियों की पढ़ाई कोरोना संक्रमण के कारण पूरी तरह बंद है। मोहल्ला पाठशाला की व्यवस्था भी कहने को है। यह कागजों में चल रही है। शिक्षक स्टॉफ की कमी का हवाला देकर मोहल्ला पाठशाला शुरू न होने की बात कह रहे हैं। वहीं विभागीय अफसर धीरे-धीरे व्यवस्थाओं में सुधार की बात कह रहे हैं।
पडरौना शहर में 10 प्राथमिक और दो जूनियर समेत कुल 12 विद्यालय बेसिक शिक्षा परिषद की तरफ से संचालित होते हैं। सोमवार दोपहर की दोपहर एक बजे साहबगंज स्थित पूर्व माध्यमिक विद्यालय में प्रभारी प्रधानाध्यापक मंजू देवी उपस्थित मिलीं। उन्होंने बताया कि विद्यालय में कुल 50 विद्यार्थी नामांकित हैं। पढ़ाई के लिए बने व्हाट्सएप ग्रुप में विद्यार्थी आनलाइन नहीं होते हैं। स्टाफ की कमी के चलते मोहल्ला पाठशाला का संचालन भी नहीं हो पाता है, लेकिन जिन बच्चों को कुछ पूछना होता है वे विद्यालय पर आते हैं तो उन्हें जरूरी जानकारियां दे दी जाती हैं।
यही हाल प्राथमिक विद्यालय साहबगंज का भी दिखा। यहां तैनात शिक्षामित्र आशा देवी ने बताया कि विद्यालय में 80 विद्यार्थी नामांकित हैं। बच्चे व्हाट्सएप ग्रुप का लाभ नहीं ले पा रहे थे, इस कारण ग्रुप निष्प्रभावी हो गया है। मोहल्ला पाठशाला का संचालन शुरू नहीं हो पाया है।
प्राथमिक विद्यालय कन्नौजिया वार्ड पूर्वी में तैनात शिक्षामित्र किरन देवी ने बताया कि यहां तैनात प्रधानाध्यापक विजय गुप्ता के पास शहर के तीन विद्यालयों का चार्ज है। सोमवार दोपहर वे छावनी स्थित प्राथमिक विद्यालय में थे। प्रधानाध्यापक विजय गुप्ता से फोन से बात हुई तो उन्होंने बताया कि छात्र-छात्राओं की ऑनलाइन पढ़ाई के लिए व्हाट्सएप ग्रुप बनाए गए थे, लेकिन विद्यार्थी स्वयं ही ग्रुप से बाहर हो गए। मोहल्ला पाठशाला का आयोजन करना था, लेकिन शिक्षकों की कमी के चलते अभी नहीं हो पा रहा है।
बीईओ एसएन प्रजापति ने स्वीकार किया कि शिक्षकों की कमी के चलते मुहल्ला पाठशालाओं का संचालन नहीं हो पा रहा है। ऑनलाइन शिक्षा समेत अन्य संसाधनों की व्यवस्था के लिए अभिभावकों को प्रेरित किया जा रहा है। यदि कोई समस्या हो तो संबंधित शिक्षक से संपर्क कर समाधान किया जा सकता है। बेहतर पढ़ाई की व्यवस्था के लिए अन्य साधनों पर विचार किया जा रहा है। दीक्षा समेत अन्य ऐप डाउनलोड कराने का भी प्रयास किया जा रहा है।