फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बाढ़ से बचाव के पुख्ता इंतजाम नहीं

विज्ञापन
अहिरौलीदान में कटान करती गंडक नदी । - फोटो : KUSHINAGAR
विज्ञापन
बांध सुरक्षित नहीं हुए तो गंडक फिर मचाएगी तबाही
विज्ञापन

कुशीनगर। बाढ़ से बचाव के पुख्ता इंतजाम नहीं होने से गंडक की तबाही की आशंका बढ़ गई है। बाढ़खंड की ओर से पूर्व में भेजे गए 40 प्रस्तावों में से 34 प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में चले जाने से लोगों स्थिति भयावह होने का खौफ साफ दिख रहा है। ग्रामीणों के विरोध को देखते हुए बाढ़ खंड अनुरक्षण मद से काम कराने का दावा कर रहा है, लेकिन बांध की स्थिति इस ओर संकेत कर रही है कि वाल्मीकि बैराज में पानी बढ़ा और नेपाल ने पानी छोड़ा तो गंडक फिर तबाही मचा सकती है।
बाढ़ के दौरान गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग पटना की टीम अक्टूबर 2018 में कुशीनगर जिले में आई थी। जगह-जगह भ्रमण कर संवेदनशील स्थानों पर कार्य योजना भेजने का सुझाव दिया था। उसी क्रम मेें बाढ़ खंड की ओर से छितौनी तटबंध की छह परियोजनाएं, एपी तटबंध की 16 परियोजनाएं, अमवाखास तटबंध की 14 परियोजनाएं और नरवाजोत-पिपराघाट की एक परियोजना शासन को भेजी गई थी। 250 करोड़ की लागत से कुल 40 परियोजनाओं में से अब तक अमवाखास की सिर्फ छह परियोजनाएं स्वीकृत हुई हैं। 60 करोड़ की लागत वाली इन छह परियोजनाएं पूरी हो गई हैं। हालांकि अभी सिर्फ पांच करोड़ रुपये का ही भुगतान हो पाया है। शेष 34 परियोजनाएं अभी पाइप लाइन में हैं। एपी तटबंध की कोई भी परियोजना अभी तक स्वीकृत नहीं हो पाई है। पिछले बारिश में गंडक के उफान से अहिरौलीदान, खैरखूटा, नोनियापट्टी समेत पांच पुरवों के करीब 150 से अधिक परिवार बेघर हो गए थे। उन्हें लंबे समय तक तबाही का दंश झेलना पड़ा था। बांध की कमजोरी को देखते हुए आसपास के लोगों की बेचैनी बढ़ी हुई है। समय से मरम्मत के लिए एपी तटबंध के किनारे बसे गांवों के लोग आंदोलन भी कर चुके हैं। यदि समय रहते लंबित 34 परियोजनाओं की स्वीकृति नहीं मिली और बांध बचाव का पुख्ता इंतजाम नहीं हुआ तो फिर गंडक तबाही मचा सकती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग पटना की टीम ने संवेदनशील स्थलों का निरीक्षण कर जो सुझाव दिया था, उसी के मुताबिक स्पर और बांध पर पीचिंग आदि के लिए कुल 40 प्रोजक्ट शासन को भेजे गए थे। उनमें छह परियोजनाएं अमवाखास तटबंध की स्वीकृति हुई और उस पर काम पूरा करा दिया गया है। अन्य परियोजनाएं स्वीकृति की प्रक्रिया में है। वैसे एपी तटबंध और नरवाजोत-पिपराघाट मार्ग पर अनुरक्षण मद से काम कराया जा रहा है। पूरी कोशिश है कि तटबंध सुरक्षित रहे। -भरतराम, एक्सईएन बाढ़खंड, कुशीनगर।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें