सर्द हवाओं ने बढ़ाई ठंड, लोगों की दिनचर्या प्रभावित
पडरौना। शीतलहर के चलते ठंड दिन प्रतिदिन बढ़ रही है। मंगलवार को कुछ देर के लिए सूर्य का दर्शन तो जरूर हुआ, लेकिन सर्द हवाओं से बढ़ी गलन भरी ठंड में लोगों की कंपकंपी छूट रही है। इससे जनजीवन अस्त-व्यस्त है। बहुत जरूरी होने पर ही लोग घर से निकल रहे हैं। मंगलवार को जिले का अधिकतम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान सात डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
मंगलवार सुबह बादल छाए हुए थे और शीतलहर चल रही थी। इससे ठंड और भी बढ़ गई। गलन भरी ठंड में लोग कांप गए। बच्चों को पूरी तरह से गरम कपड़ों से ढककर ही लोग घरों से निकले। गलन भरी ठंड में बच्चों और बुजुर्गों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बच्चे और बूढ़े घर से निकलने में ही परहेज कर रहे हैं। मंगलवार दोपहर बाद करीब एक घंटे तक हल्की धूप निकली, लेकिन बादल छाए रहने और सर्द हवा चलने से धूप का असर नहीं हुआ। ठंडी हवा के थपेड़े सीधे चेहरे पर लग रहे थे।
कड़ाके की ठंड देख नगरपालिका परिषद की तरफ से नगर के सुभाष चौक, छुछिया गेट, तिलक चौक, बस स्टेशन, रेलवे स्टेशन, साहबगंज समेत विभिन्न चौराहों और तिराहों पर अलाव जलाया गया है। शाम को सब्जी आदि जरुरी सामान की खरीदारी के लिए घर से निकले लोग बाजार में कार्य निपटाकर जल्द वापस जाते दिखे।
सेवरही स्थित कृषि विज्ञान केंद्र की मौसम वैज्ञानिक श्रुति वी सिंह ने बताया कि आने वाले दिनों में बादल छाए रहने और सर्द हवा चलने की संभावना है। इसके चलते अभी कुछ दिनों तक इसी तरह ठंड बनी रहने की संभावना है।
‘बंद कमने में जलाएं अलाव’
पडरौना नगर के फिजिशियन डॉ. संदीप अरुण ने बताया कि घर में बंद कमरे में अलाव नहीं जलाना चाहिए। लकड़ी के जलने से कार्बन डाई ऑक्साइड निकलती है। कोयला या जली लकड़ी का अवशेष जलाने पर उससे कार्बन मोनो ऑक्साइड गैस निकलती है, जो सेहत के लिए हानिकारक होती है। कॉर्बन मोनो ऑक्साइड गैस निकलने पर दम नहीं घुटता है। आदमी सोया ही रह जाता है। इसलिए अलाव हमेशा खुले कमरे में जलाना चाहिए।
पछुआ हवा ने बढ़ाई लोगों की मुश्किलें
कसया। कुछ दिनों से शीतलहर के कारण कड़ाके की ठंड से जनजीवन बेहाल हो गया है। तापमान में आई गिरावट के साथ चल रही पछुआ हवा ने मंगलवार को मौसम सर्द कर दिया। दिनभर लोग शीतलहर व ठंड की मार झेलते रहे।
ठंड की हालत यह रही कि राष्ट्रीय राजमार्ग-28 के किनारे ही टायर जलाकर आग से लोग शरीर गर्म करते दिखे। टायर जलाकर आग तापने वाले लोगों का कहना था कि ठंड से बचने के लिए विवश होकर टायर जलाया जा रहा है। टायर जलने से काला धुआं निकल रहा था।