कसया। परंपरागत एवं लुप्तप्राय कलाओं के संवर्धन में अग्रणी अखिल भारतीय संस्था संस्कार-संगम के तत्वावधान में नगर स्थित चित्रतुली भवन में पद्मश्री शारदा सिन्हा की याद में स्वरांजलि का आयोजन हुआ। कार्यक्रम का आरंभ दीप प्रज्ज्वलन, माल्यार्पण एवं एकात्मता मंत्र के गायन से हुआ।
संस्था के अध्यक्ष अशोक कुमार जैन ने शारदा सिन्हा की आवाज में संवेदनशीलता है। वह गीतों के माध्यम से लोगों के दिलों में जीवित रहेंगी। दिनेश तिवारी भोजपुरिया ने कहा कि शारदा सिन्हा जी ने मैथिली, भोजपुरी, हिंदी के पारंपरिक लोकगीतों के अलावा हिंदी सिनेमा को भी योगदान दिया है। डाॅ. अंबरीष विश्वकर्मा ने कहा कि शारदा सिन्हा ने लुप्तप्राय विधाओं के संरक्षण में अंतिम क्षण तक योगदान दिया।
वंदना मद्धेशिया ने ...बस राम राम बस राम राम...। किरण जायसवाल ने ...जगदंबा घर में दीयना बारी अइली हो...,सुनंदा शर्मा ने ..कोयल बिन बगिया ना सोहे राजा...। निधि शर्मा ने ...कहे तोसे सजना ई तोहरी सजनिया...। दिनेश तिवारी ने ..राम जी से पूछे जनकपुर के नारी..आदि अनेक गीतों की प्रस्तुति से स्वरांजलि दी। संस्था के मंत्री पवन गुप्ता ने अतिथियों के प्रति आभार ज्ञापित किया। संचालन शिक्षक राजू कुमार मद्धेशिया ने किया। इस दौरान धनंजय राव, नारायण जायसवाल, विवेक विश्वकर्मा, रमेश मद्धेशिया, धीरज जायसवाल आदि मौजूद रहे।