सेवरही में श्रीमद् भागवत कथा सुनातीं व्यास सोनम।संवाद
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तमकुहीरोड। मनुष्य को जीवन में अपने अनुशासन और संस्कार को सर्वोपरी रखना चाहिए। इससे व्यक्ति में दया, प्रेम व परोपकार की भावना होगी, जिससे स्वस्थ समाज की स्थापना करने में मदद मिलेगी। लोगों को अपने बच्चों में अच्छे संस्कार और अनुशासन की सीख देना चाहिए। लोगों को बच्चों में प्रहलाद, ध्रुव और नचिकेता बनने की प्रेरणा विकसित करनी चाहिए, ताकि वे आगे चलकर मजबूत राष्ट्र और समाज निर्माण में अहम भूमिका निभा सकें।
ये बातें कथा वायक ब्यास सोनम ने कहीं। सेवरही के पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर के बरई टोला में चल रहे सात दिवसीय श्री शतचंडी महायज्ञ के पांचवें दिन बुधवार को श्रीमद्भागवत कथा में उन्होंने कहा कि देश में जितने भी महापुरूष हुए, उनके माता-पिता ने उनमें अनुशासन और संस्कार की भावना जागृत की थी। इसके पहले यज्ञाचार्य पंडित रितेश मिश्र ने मुख्य यजमान धनंजय चौरसिया और अंकित कुशवाहा के साथ वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यज्ञ के पांचवें सोपान का पूजा पाठ संपन्न कराया।
इस दौरान राकेश गुप्ता, राजेश चौरसिया, राजू गुप्ता, रामानंद कुशवाहा, मदन गुप्ता, पंकज चौरसिया, संजय गुप्ता, बृजेश चौरसिया, विजय गुप्ता आदि मौजूद रहे।