कसया। केंद्र सरकार ने क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजना के संशोधित संस्करण को मंजूरी देते हुए देश में हवाई यात्रा को अधिक सुलभ, किफायती और समावेशी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इस पहल से टियर-2 और टियर-3 शहरों सहित दूरदराज के क्षेत्रों को बेहतर हवाई संपर्क मिलने की उम्मीद है।
एयरपोर्ट के डायरेक्टर प्राणेश कुमार राय ने बताया कि देशभर में 100 नए हवाई अड्डों के विकास का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही पहाड़ी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, द्वीपीय क्षेत्रों, उत्तर-पूर्वी राज्यों और आकांक्षी जिलों में 200 हेलीपोर्ट विकसित किए जाएंगे। इससे दुर्गम क्षेत्रों में भी कनेक्टिविटी मजबूत होगी।
इस योजना में हवाई अड्डों के विकास के लिए ‘चैलेंज मोड’ अपनाया जाएगा। इसके तहत राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अपनी मांग और तैयारियों के आधार पर हवाई अड्डों को नामित करेंगे, जिससे बुनियादी ढांचे का तेजी से विस्तार संभव होगा। साथ ही, हवाई अड्डों के संचालन और रखरखाव के लिए तीन वर्षों तक सहायता दी जाएगी, जिससे परिचालन स्थिरता बनी रहे। राज्यों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए राज्य-समर्थित ढांचा तैयार किया गया है।
वहीं, आम यात्रियों को राहत देने के लिए बड़े विमानों में अधिक सीटों पर किफायती किराए उपलब्ध कराए जाएंगे। मार्गों को आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाने के लिए ‘वायबिलिटी गैप फंडिंग’ को तीन वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष किया गया है। इसके अलावा, आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत घरेलू विमान निर्माण को बढ़ावा देने के लिए विमान अधिग्रहण में भी सहायता प्रदान की जाएगी।
इस योजना का उद्देश्य नए हवाई अड्डों, हेलीपोर्ट और जल हवाई अड्डों के विकास के जरिए क्षेत्रीय हवाई संपर्क को मजबूत करना, दूरस्थ क्षेत्रों में आर्थिक अवसर बढ़ाना और देश में विमानन क्षेत्र का संतुलित एवं टिकाऊ विकास सुनिश्चित करना है।