सुकरौली में गन्ने की फसल के बगल में जलती पराली। स्रोत-सोशन मीडिया
सुकरौली। क्षेत्र में पराली जलाने पर रोकथाम नहीं लगाई जा रही है। इस कारण सड़क से आवागमन करने वालों और आमजन को दिक्कत हो रही है। रविवार को गन्ने की फसल और कस्बे के आस पास खुलेआम पराली जलाई जा रही थी। गनीमत रहा कि कोई अनहोनी नहीं हुई। जिम्मेदारों की अनदेखी से पराली के आस पास खड़े धान और गन्ने की फसल में आगजनी का खतरा है।
सुकरौली क्षेत्र में करीब दस से अधिक जगहों पर पराली जलाई गई। रोकथाम पर शासन का यह निर्देश महज कागजी खानापूर्ति बनकर रह गई है। पिछले वर्ष डीएम से शिकायत के बाद जब ऊपर से सख्ती हुई तो चार कंबाइन मशीन को सीज कर विभागीय स्तर पर पांच किसानों पर जुर्माना भी लगाया गया था।
उसके बाद स्थानीय अधिकारी जगे थे, लेकिन ज्यादातर किसान पराली व्यवस्था को लेकर अनभिज्ञ हैं। किसानों को जागरूक भी नही किया गया। पराली से जलाने से जुड़े नियम, कायदे क्या है वह अधिकांश किसानों को पता ही नहीं है। जबतक किसानों को पराली व्यवस्था की पूरी जानकारी नहीं होगी, तब तक इस महत्वपूर्ण अभियान को सफल बनाना संभव नहीं है।
पिछले साल आग से झुलसने से हुई थी महिला की मौत
सुकरौली। हाटा कोतवाली के गनेशपुर निवासी राजकुमारी देवी पत्नी कैलाश यादव करीब डेढ़ साल पहले घास काटने के दौरान बगल के खेत में जल रही पराली से फैली आग की चपेट में आकर बुरी तरह झुलस गईं थीं। आस पास के लोगों ने की तत्परता से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सुकरौली पहुंचाया था। जहां उपचार के बाद हालत गम्भीर देखते हुए डॉक्टरों ने मेडिकल कालेज रेफर कर दिया था। इसके अलावा कई लोगों की फसल जल गई थी। वहीं शासन के निर्देश का असर स्थानीय प्रशासन की गम्भीरता से नही लेने से इस तरह की घटनाएं अक्सर होती रहती है।