पडरौना। विश्व एड्स दिवस पर रविवार को जिला क्षय रोग कार्यालय से जागरूकता रैली निकाली गई। हस्ताक्षर अभियान चलाकर लोगों को एड्स के प्रति जागरूक किया गया। गोष्ठी के दौरान आमजन व स्वास्थ्यकर्मियों को एड्स के रोकथाम को लेकर जानकारी दी गई।
मुख्य अतिथि सीएमओ डॉ. सुरेश पटारिया ने कहा कि एड्स पीड़ित व्यक्ति की पहचान गुप्त रखी जाती है। बुखार, थकान, सूखी खांसी, वजन का कम होना, त्वचा, मुंह, आंख या नाक के पास धब्बे पड़ना और शरीर में दर्द की शिकायत आदि एड्स के लक्षण हो सकते हैं। इन्हें नजरअंदाज न करें। तत्काल स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर जांच कराएं। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. एसके त्रिपाठी ने कहा कि एक्वायर्ड इम्यूनो डेफिशिएंसी सिंड्रोम (एड्स), एचआईवी (ह्यूमन इमयूनोडेफिशिएंसी वायरस) की एक अवस्था है, जिसमें मानव शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को धीरे-धीरे कमजोर होती जाती है।
उन्होंने कहा कि जिले में मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल और पुरुष एवं नेत्र अस्पताल तथा सभी सीएचसी, आईसीटीसी, पीपीटीसीटी आदि केन्द्रों पर एड्स की जांच की जाती है। किसी भी ऑपरेशन अथवा रक्तदान से पूर्व संबंधित की जांच की जाती है। इसके अलावा सभी गर्भवती की भी प्रसवपूर्व जांच के दौरान एचआईवी जांच की जाती है। अगर किसी गर्भवती में एचआईवी वायरस पाया जाता है तो उसके होने वाले बच्चे के एड्स संक्रमित होने की 20 फीसद तक की संभावनाएं होती हैं, लेकिन समय पर महिला के इलाज से बच्चे का यह संक्रमण 10 फीसदी से कम किया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि जिले में एचआईवी संक्रमण से ग्रस्त लोगों को चिह्नित करने का कार्य साल 2002 से शुरू हुआ। नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (नॉको) के सहयोग से यूपी स्टेट एड्स कंट्रोल सोसाइटी (यूपी सैक्स) के निर्देश पर जिला एड्स नियंत्रण सोसाइटी यह कार्य कर रही है। इस दौरान अनिल कुमार सिंह, मंजू देवी, तारकेश्वर सिंह, अश्वनी गुप्ता, अकबर अली, हरीश द्विवेदी, अनूप कुमार गोंड़, राकेश सिंह, विवेक यादव, विशाल जायसवाल, मुन्नी देवी, विश्वजीत ओझा, हंसराज कुमार, अजीत प्रसाद, अम्बे चौबे, अरविंद कुमार शाह, संतोष कुमार, रत्नेश मणि त्रिपाठी, साजिद अली, चंद्रशेखर यादव, सुधा, रवि सिंह, पूनम भारती, किरण, खुशबू शुक्ला आदि मौजूद रहे।