कुशीनगर/खड्डा। जिले में करोड़ों रुपये बाढ़ से बचाव पर खर्च करने के बाद भी लोगों को राहत नहीं मिल रही है। छितौनी, एपी और नरवाजोत बंधे से सटकर गंडक नदी बह रही है। छितौनी बंधे पर भैसहा गांव के पास शुक्रवार को अचानक नदी कटान करने लगी और 200 मीटर कटान होने से लांचिंग पैड का हिस्सा धंस गया। जनरेटर चलाकर बंधे पर बचाव कार्य चला। शनिवार को भी इंजीनियर और एई बंधे पर जमे रहे। वहीं नरवाजोत और एपी बंधे पर नदी का दबाव बढ़ता जा रहा है, नरवाजोत बंधे पर कई बार तीन माह के अंदर नदी ने कटान किया। बचाव के लिए अफसरों को मशक्कत करना पड़ा। इसके अलावा रोहुआ नाला के ऊफनाने से नदी उस पार के गांव वालों को नाव की मदद से आना जाना पड़ रहा है।
नेपाल से निकली बड़ी गंडक नदी जिले के खड्डा और तमकुहीराज तहसील से होकर बिहार की ओर निकली है। पानी का दबाव बढ़ने के बाद बंधे पर निगरानी बढ़ा दी गई है। शुक्रवार की रात करीब आठ बजे अचानक भैसहा गांव के पास नदी कटान करनी लगी। बचाव के लिए जाली में बांधकर लगाए गए पत्थर नदी में समा गए। छितौनी तटबंध के किलोमीटर 8.650 व 8.800 पर बने स्पर (ठोकर) पर नदी का तेज दबाव शुरू हुआ। इसके साथ ही कटान होने लगा। ठोकर व तटबंध के सुरक्षा के लिए बने लांचिंग पैड व जमीन कटने लगे लगभग दो से तीन लेयर पैड को नदी ने काट दिया। नदी के तेवर को देखकर गांव में चिंता बढ़ गई। बाढ़ खंड के जेई अपनी टीम के साथ पहुंचे और जनरेटर लगाकर की रोशनी में परक्यूपाइन में झाड़ी व पेड़ की टहनियों की मदद से कटान को रोकने का प्रयास करने लगे।
आधी रात के बाद कुछ राहत मिला। इसके साथ ही नदी के जलस्तर में कमी आ गई और कटान नरम हुआ। बाढ़ खंड के अधिकारी मौके पर बचाव के लिए पत्थर एवं अन्य जरूरी सामान का स्टाक कर लिया गया है। कटान धीमा होने से लोगों ने राहत की सांस ली है। वहीं रोहुआ नाला उऊनाने से नदी उस पार के लोगों की परेशानी बढ़ गई है। आने जाने का सहारा सिर्फ नाव है।
कोट,
रात में कटान शुरू हुई। पूरी रात टीम बंधे पर जमी रही और बचाव कार्य चला। नदी का जलस्तर कम हुआ है और कटान भी रुकी है। बंधे पर बोल्डर गिरा दिया गया है। परक्यूपाइन सहित सभी कटावरोधी कार्य चल रहा है। अभी चिंता की कोई बात नहीं है। बचाव के लिए पूरा इंतजाम है। एचएलसी टीम के समक्ष यहां की स्थिति को रखा जाएगा तथा पुनर्स्थापना हेतु परियोजना बनाई जाएगी।
-मनोरंजन कुमार, एसडीओ, बाढ़ खंड
कटान स्थल पर खर्च किए जा चुके हैं 11 करोड़
छितौनी तटबंध पर जहां कटान हो रही है। इसके आसपास करीब चार वर्ष पहले 11 करोड़ से ज्यादा रकम खर्च कर पुनर्स्थापना कार्य किया गया था। हालांकि अब यहां कार्ययोजना बनाकर कार्य जरूरी है। वर्ष 1968-69 में 4.68 की लागत से 14.400 किलोमीटर लंबे खडडा क्षेत्र में गंडक नदी पर बने छितौनी तटबंध पर मरम्मत व सुदृढ़ करने के नाम पर हर वर्ष बहुत बड़ी रकम खर्च होती है। परंतु इसकी कोई गारंटी नहीं है कि तटबंध नहीं टूटेगा।
तटबंध पर हर वर्ष हाई लेवल (एचएलसी) कमेटी दौरे पर आती है तथा जहां मरम्मत या मजबूती की आवश्यकता दिखती है। वहां परियोजना बनाकर कार्य करने की संस्तुति करती है। इसी के बाद परियोजना स्वीकृत होती है एवं धन मिलता है।हर वर्ष सुदृढ़ करने का कार्य होता है और बड़ी रकम खर्च होती है। इस वर्ष भी कई जगह पुनर्स्थापना का कार्य किया गया है। इसी क्रम में वर्ष 2021 में तटबंध के किलोमीटर 8.530,8.780 के बीच रिवेंटमेंट निर्माण कार्य तथा किलोमीटर 8.551, 8.650 व 8.800 के बीच लाकिंग एप्रन एवं पुनर्स्थापना का कार्य हुआ था। इस पर 11.68 रुपये खर्च हुए थे। वर्तमान में नदी के रूख व दबाव तथा कटान को देखते हुए यहां व इसके आसपास प्वाइंट पर बृहद कार्ययोजना बनाकर पुनर्निर्माण करने की जरूरत है।
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मदनपुर में टूट चुका है तटबंध
वर्ष 2008-09 में तटबंध के किलोमीटर 3.200 (मदनपुर गांव के पास) बाढ़ के समय तटबंध टूट गया। नदी की धारा मुख्य पश्चिमी गंडक नहर की पटरी तोड़ कर नहर में बहने लगी थी। गनीमत रहा की नहर की दाहिनी पटरी नहीं टूटी और नदी का जलस्तर कम हो गया और बड़ा नुकसान होने से बचा था।
वर्ष 2023 में तटबंध के किलोमीटर 0.200 के पास बनी एक पुरानी (पाइप का साइफन) के बगल से चूहों ने आर पार छेद कर दिया था। इसी रास्ते पानी का रिसाव हो रहा था। बाढ़ खंड के लोगों ने अनदेखा किया और तटबंध टूट गया। इस बार अचानक जलस्तर कम हुआ और पानी गैनही ड्रेन में बहने लगा और बड़ा नुकसान होने से बच गया। इसके अलावा किलोमीटर 6.800 तथा 8.600 एवं 12.000 सहित कई जगह टूटते टूटते बचा है। उल्लेखनीय है कि अगर तटबंध के किलोमीटर 6.000 से 13.000 के बीच तटबंध टूटा तो बहुत बड़ा नुकसान जाएगी।