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Kushinagar News: हिंदी यात्रा साहित्य के जनक थे राहुल सांकृत्याया

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कसया। राहुल सांकृत्यायन संस्थान पुस्तकालय व अभिलेखागार कुशीनगर में बृहस्पतिवार को महापंडित राहुल सांकृत्यायन की 133वीं जयंती मनाई गई। मुख्य अतिथि पूर्व विधायक रजनीकांत मणि त्रिपाठी ने कहा कि राहुल हिंदी यात्रा साहित्य के जनक थे। बौद्ध साहित्य को समृद्ध बनाने में उनका महत्वपूर्ण योगदान है।
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पूर्व विधायक ने कहा कि राहुल का जन्म आज के ही दिन 1893 में आजमगढ़ के पंदहा गांव में हुआ था। उन्होने पहले वैष्णव धर्म की दीक्षा ली, फिर आर्य समाज से जुड़ गए। बौद्ध धर्म के अध्ययन के बाद वह 1930 में श्रीलंका में बौद्ध हो गए। आधुनिक हिंदी साहित्य में वह एक साम्यवादी चिंतक, पत्रकार, इतिहासकार, तत्वांवेषी, युग परिवर्तनकार साहित्यकार के रूप में जाने जाते हैं। अध्ययन के लिए उन्होंने तिब्बत से लेकर श्रीलंका तक की यात्रा की। मध्य एशिया व काकेशस भ्रमण पर भी यात्रा वृतांत लिखा। लगभग 150 पुस्तकें लिखकर बौद्ध साहित्य को समृद्ध किया।
जय अवधेय, सिंह सेनापति, वोल्गा से गंगा तक आदि उनके प्रसिद्ध उपन्यास हैं। आयोजक पुस्तकालय सचिव संजीव कुमार उपाध्याय ने आभार ज्ञापित किया। प्रारंभ में भिक्षुओं ने बुद्ध वंदना कर राहुल के चित्र पर पुष्पार्चन किया। इस दौरान भंते भिक्षु विमल कीर्ति , भिक्षु हरिबल शाक्या, कर्मा कुंगा जेनफेन, निदेशक राहुल सांकृत्यायन संस्थान पुस्तकालय कुशीनगर, शकुंतला उपाध्याय, रविंद्र शर्मा, नवनाथ दुबे, प्रभुनाथ पांडेय आदि मौजूद रहे।
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