महंगाई की मार से जनता लाचार
पेट्रोल-डीजल, रसोई गैस, खाद्य सामग्री सहित अन्य वस्तुएं हुईं महंगी
बिगड़ा रसोई का बजट, किसान, व्यापारी, गृहिणी सब परेशान
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना (कुशीनगर)। कोरोना संकटकाल में आर्थिक तंगी से जूझने के बाद अब आम जनता महंगाई की मार झेल रही है। पेट्रोलियम पदार्थों के दाम में बेतहाशा वृद्धि से सभी चिंतित हैं। डीजल, पेट्रोल और रसोई गैस के दाम में हो रही वृद्धि से किसान, व्यापारी, गृहिणी सहित हर वर्ग के लोग परेशान हैं। इसके अलावा घी, सरसों के तेल, दाल व चाय आदि खाद्य पदार्थों के भी दाम काफी बढ़ चुके हैं। लगातार बढ़ रही महंगाई से रसोई का बजट बिगड़ चुका है। घर-घर में लोग परेशान हैं। हर माह 2000 रुपये का आने वाला राशन अब ढाई हजार रुपये में पड़ रहा है। वहीं गैस सिलिंडर की कीमत बढ़ने से लोग सोचने पर मजबूर हो गए हैं। पेट्रोल के दाम बढ़ने से नौकरीपेशा लोगों की जेब ढीली हो रही है। डीजल के दाम में वृद्धि होने के कारण माल भाड़ा भी बढ़ गया है। किसान खेतों की जुताई और फसलों की सिंचाई में खर्च बढ़ने से चिंतित हैं।
महिलाएं बोलीं -अच्छे दिन अभी नहीं आए
श्रुति गोयल का कहना है कि अच्छे दिन अभी नहीं आए हैं। जबरदस्ती की खुशियां दिखाई जा रही हैं। कोरोना के कारण लोगाें को आर्थिक समस्या का सामना करना पड़ रहा है। लोगों के पास रुपये नहीं हैं। बच्चों एवं परिवार के लिए पौष्टिक भोजन जुटाना मुश्किल हो गया है। रसोई गैस की कीमत बढ़ती जा रही है। अब तो गैस सिलिंडर 842 रुपये तक पहुंच गया है।
लोगों पर पड़ रही महंगाई की मार
सौरहा खुर्द निवासी किसान श्रीभगवान चौधरी ने कहा कि रविवार को पेट्रोल 88.94 और डीजल 81.47 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया। खाने-पीने से लेकर जरूरत के सभी सामान पहुंच से दूर होते जा रहे हैं। पेट्रोलियम पदार्थों के दाम बढ़ने से इसका असर चौतरफा पड़ रहा है। खेत की जुताई और सिंचाई के लिए किसानों को जेब और ढीली करनी पड़ेगी। खेत से चीनी मिल तक का भाड़ा पहले 30 रुपये प्रति क्विंटल था, वह अब 40 रूपये प्रति क्विंटल हो गया है। खेती की जुताई एक कट्ठा की 40 रुपये से बढ़कर 50 रुपये हो गई है। 170 रुपये प्रति घंटे के हिसाब से पंपिंग सेट से सिंचाई होती थी, वह अब 230 रुपये प्रति घंटे देना पड़ रहा है। डीजल महंगा होने से अन्य वस्तुओं के मूल्यों में बढ़ोतरी की मार झेलनी पड़ रही है। महंगाई पर रोक लगनी चाहिए। पेट्रोल-डीजल के दाम 60 रुपये प्रति लीटर से अधिक नहीं होने चाहिए।
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जीएसटी में शामिल हो पेट्रोल-डीजल
व्यपारी सचिन चौरसिया ने कहा कि बेलगाम महंगाई पर रोक लगाने में सरकार विफल है। इसकी वजह से जनता की परेशानी बढ़ती जा रही है। सबसे अधिक दिक्कत गरीब लोगों को हो रही है। वास्तविक मूल्य से अधिक टैक्स वसूला जा रहा है। इसकी वजह से पेट्रोल एवं डीजल के मूल्य बढ़ते जा रहे हैं। असर पूरे बाजार पर होता है, मार जनता पर पड़ती है। सरकार को पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस को भी जीएसटी में शामिल करना चाहिए। तभी इसके दाम में नियंत्रण किया जा सकेगा।
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नौकरी पेशा वालों की ढीली हो रही जेब
अधिवक्ता केके पांडेय ने कहा कि अधिकांश कर्मचारी अपने निजी वाहनों से दफ्तर जाते हैं। डीजल और पेट्रोल के दाम में हो रही लगातार बढ़ोतरी से नौकरी पेशा वाले लोगों को दफ्तर आने-जाने में जेब ढीली करनी पड़ रही है। बजट आने के बाद लोगों को महंगाई पर नियंत्रण की उम्मीन थी, लेकिन महंगाई को रोकने में विफल रही सरकार से लोग नाराज हैं। सरकार को पेट्रोलियम पदार्थों के मूल्य नियंत्रित करने के लिए ठोस उपाय करने चाहिए।
पेट्रोल का भाव-
21 जनवरी 2021 - 83.66 रुपये प्रति लीटर
21 फरवरी 2021 - 88.94 रुपये प्रति लीटर
डीजल का भाव
21 जनवरी 2021 - 74.29 रुपये प्रति लीटर
21 फरवरी 2021 - 81.47 रुपये प्रति लीटर
घरेलू गैस सिलेंडर का मूल्य
21 जनवरी 2021 - 768 रुपये
21 फरवरी 2021 - 842 रुपये
ट्रांसपोर्टर्स ने नहीं बढ़ाया मालभाड़ा
दिल्ली गोरखपुर ट्रांसपोर्ट के प्रोपराइटर विजय प्रताप सिंह ने बताया कि सरकार की ओर से लगातार ईंधन के दाम में वृद्धि की जा रही है। ट्रांसपोर्ट कारोबारियों की कोई सुन नहीं रहा है। फिलहाल तो मालभाड़े में वृद्धि नहीं की गई है, लेकिन पेट्रोल और डीजल के दाम इसी तरह बढ़ते रहे तो कुछ दिन में ही मालभाड़ा बढ़ाना पड़ेगा।