पडरौना। दिवानी न्यायालय परिसर स्थित एडीआर भवन में पॉक्सो अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर त्रैमासिक बैठक हुई। बाल यौन अपराधों से पीड़ित बच्चों को न्याय, पुनर्वास और जरूरी सहायता समय से उपलब्ध कराने समेत अन्य बिंदुओं पर चर्चा की गई। इसके अलावा बैठक में जांच और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान पीड़ित बच्चों को मनोवैज्ञानिक, सामाजिक, चिकित्सकीय और कानूनी सहायता उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव भुवन ने कहा कि पाॅक्सो अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन में किसी भी स्तर से लापरवाही न हो। इसके लिए हर संभव कदम अधिकारियों को उठानी चाहिए। उन्होंने अधिनियम के क्रियान्वयन में आने वाली व्यावहारिक दिक्कतों और डीएनए सैंपल के संरक्षण और पर्याप्त फॉरेंसिक लैब की उपलब्धता आदि बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की।
जिला प्रोबेशन अधिकारी शैलेंद्र कुमार गौतम ने पीड़ितों को चिकित्सकीय खर्च और अन्य राहत के लिए समय से अंतरिम मुआवजा उपलब्ध कराने की जानकारी दी। विशेष अभियोजन अधिकारी एसपी यादव ने पॉक्सो मामलों में न्यायालय में विचारण की प्रक्रिया समझाई। एसीएमओ डॉ. आरडी कुशवाहा ने पीड़ित बच्चों को तत्काल चिकित्सकीय उपचार उपलब्ध कराने के साथ मानसिक आघात से उबारने के लिए नियमित काउंसलिंग की आवश्यकता बताई। उप निरीक्षक प्रगति जायसवाल और राजेश कुमार ने पॉक्सो मामलों की विवेचना और पुलिस स्तर पर की जाने वाली कार्रवाई के बारे में जानकारी दी।
इस दौरान डीआईओएस श्रवण कुमार गुप्ता, बीएसए अनिल कुमार सिंह, धनंजय मणि त्रिपाठी, संदीप कुमार पांडेय, अनिरुद्ध कुशवाहा, रीता यादव, नलिन सिंह, अभिषेक कुमार सिंह, आदि मौजूद रहे।