पडरौना। सूबे के राज्यमंत्री राधेश्याम सिंह की तरफ से जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी को मोबाइल पर गाली दिए जाने के मामले को लेकर कार्यालय के अधिकारी-कर्मचारी सोमवार को लामबंद हो गए। अपर मुख्य अधिकारी की मौजूदगी में अधिकारियों-कर्मचारियों ने जिला पंचायत कार्यालय में बैठक करने के बाद राज्यमंत्री के विरुद्ध नारे लगाए और पैदल ही पुलिस लाइंस पहुंचकर एसपी को ज्ञापन सौंपा। इन लोगों ने इस मामले में मुकदमा दर्ज किए जाने की मांग की। अधिकारियों-कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि इस मामले में विधिक कार्रवाई नहीं की गई तो समस्त कार्मिक हड़ताल करने के लिए विवश होंगे। दूसरी ओर राज्यमंत्री के समर्थक जिला पंचायत सदस्य जवाहर लाल गौतम ने अपर मुख्य अधिकारी के विरुद्ध पडरौना कोतवाली में तहरीर दी। उन्होंने अपर मुख्य अधिकारी पर जिला पंचायत से काम न देने और पूछने पर गाली और धमकी देने का आरोप लगाया है।
जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी उमेश पटेल ने एसपी को बताया कि बताया कि 28 जुलाई की रात 08:05 बजे प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री राधेश्याम सिंह ने जिला पंचायत की तरफ से अनियमित तरीके से टेंडर कराने का आरोप लगाते हुए भद्दी-भद्दी गालियां दी गईं और जान से मारने की धमकी भी दी। उनका कहना था कि इस घटना के बाद से जिला पंचायत के अधिकारी-कर्मचारी असुरक्षा की भावना से ग्रस्त हैं। इससे काम-काज नहीं हो पा रहा है।
उन्होंने कहा कि यदि जिला पंचायत के अधिकारियों और कर्मचारियों को सुरक्षा प्रदान करते हुए राज्यमंत्री के विरुद्ध विधिक कार्रवाई नहीं की जाती है तो समस्त कार्मिक कार्य बहिष्कार करने के लिए विवश होंगे। ज्ञापन पर शशिकांत शुक्ल, रामकुमार, केएन गुप्ता, राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के जिलाध्यक्ष प्रभुनंद उपाध्याय, विनोद कुमार दुबे, वीरेश्वर सिंह, राघवेंद्र राव, चंचल तिवारी, मोहन वर्मा, मारकंडेय मल्ल, दिनेश कुशवाहा, शैलेंद्र त्रिपाठी, अवधेश, सुजीत कुमार, राजेश्वर, विजय गुप्ता, अभिमन्यु, बाबूराम, प्रेमशंकर सहित कई लोगों के हस्ताक्षर हैं।
इधर, मोतीचक ब्लॉक के वार्ड नंबर-30 से जिला पंचायत सदस्य जवाहर लाल गौतम ने सोमवार को पडरौना कोतवाली में दी गई अपनी तहरीर में बताया कि 29 जुलाई को सुबह 09:40 बजे अपर मुख्य अधिकारी उमेश पटेल से फोन पर बात हुई थी। उसी दिन दोपहर में 01:15 बजे वह अपर मुख्य अधिकारी से रामआशीष दास गुप्ता, सत्यकाम पांडेय के साथ वार्ता करने पहुंचे। सदस्य का आरोप था कि 30 मार्च को हुई बैठक में सभी जिला पंचायत सदस्यों को बराबर-बराबर कार्य कराने का प्रस्ताव पारित हुआ था, लेकिन उसके अनुरूप कार्रवाई नहीं की गई। सदस्य का आरोप है कि इस बात पर नाराज होकर अपर मुख्य अधिकारी ने उन्हें जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए गाली दी तथा हाथ-पैर तोड़ने की धमकी दी। उन्होंने अपर मुख्य अधिकारी के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई किए जाने की मांग की। उनके साथ कई जिला पंचायत सदस्य भी कोतवाली पहुंचे थे। इसके अलावा जनपद के अन्य हिस्सों में भी घटना को लेकर विरोध-प्रदर्शन जारी है।