कसया। गन्ने की फसल को खरपतवार से बचाना किसानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। खरपतवार फसल की बढ़वार को प्रभावित करते हैं और उत्पादन व गुणवत्ता दोनों को नुकसान पहुंचाते हैं।
गन्ना किसान संस्थान प्रशिक्षण केंद्र पिपराइच के पूर्व सहायक निदेशक एवं गन्ना विशेषज्ञ ओम प्रकाश गुप्ता ने बताया कि खरपतवार गन्ने की उपज में 35 से 40 प्रतिशत तक कमी कर देता है। खरपतवार ऐसे अवांछित पौधे होते हैं जो बिना बोए खेतों में उग आते हैं और फसल के पोषक तत्व, नमी व सूर्य के प्रकाश का अधिक दोहन करते हैं। उन्होंने बताया कि खरपतवार नियंत्रण के लिए किसानों को फसल चक्र अपनाना चाहिए। एक ही खेत में लगातार गन्ना बोने से बचना चाहिए। गन्ने की पंक्तियों के बीच सूखी पत्तियां बिछाकर मल्चिंग करने से भी खरपतवार की वृद्धि रोकी जा सकती है। समय-समय पर निराई-गुड़ाई भी जरूरी है। उन्होंने बताया कि रासायनिक नियंत्रण के तहत सिंचाई के 3 से 4 दिन बाद 2.4-डी (58%) घोल का छिड़काव किया जा सकता है। अधिक खरपतवार होने पर एक लीटर और कम होने पर आधा लीटर दवा, साथ में 200 ग्राम मेट्रीब्यूजीन और 500 ग्राम एट्राजीन को 200 लीटर पानी में घोलकर गन्ना बोने के 30-35 दिन बाद छिड़काव करना लाभकारी होता है।