सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र दुदही
- बिजली कटते ही बढ़ जाती है मरीजों की परेशानी, नहीं चलता जेनरेटर
- अस्पताल परिसर में नहीं पेयजल व्यवस्था, शौचालय भी बदहाल
- 30 शैय्या वाले दुदही सीएचसी में क्षेत्र के दो लाख लोगों के इलाज की है जिम्मेदारी
संवाद न्यूज एजेंसी
दुदही। कस्बा स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में इस भीषण गर्मी में मरीजों की परेशानी बढ़ जा रही है। खासकर प्रसूताएं एवं उनके नवजात बच्चों को अधिक दिक्कतें हो रही हैं। वे पसीना से बेहाल हो जा रहे हैं। क्योंकि बिजली कटने के बाद जेनरेटर नहीं चलता। इसके अलावा यहां पेयजल और शौचालय की स्थिति भी बदहाल है।
सीएचसी परिसर में समय-समय पर साफ-सफाई नहीं होने से जगह-जगह गंदगी फैली हुई है। इससे यहां इलाज कराने आने वाले मरीज और उनके तीमारदारों को परेशानी हो रहीहै। दुदही सीएचसी में 30 शैय्या वाला वार्ड है, जिस पर क्षेत्र के दो लाख से अधिक लोगों के इलाज की जिम्मेदारी है। इस अस्पताल परिसर में लगे इंडिया मार्का हैंडपंप खराब हो गए हैं। जो सही हैं वे दूषित पानी देते हैं। इसके चलते लोगों को बाहर से बोतल बंद पानी खरीदकर पीना पड़ता है।
अस्पताल परिसर में बना शौचालय भी बदहाल है। इससे शौच महसूस होने पर लोगों को खुले में जाना पड़ता है। यहां बिजली कटने के बाद मरीजों की परेशानी बढ़ जा रही है।
शनिवार को प्रसव कराने आई एक महिला गर्मी के चलते परेशान थी। अस्पताल में बिजली नहीं थी। जेनरेटर भी बंद पड़ा था।
इस अस्पताल में प्रतिदिन 300 से अधिक लोग इलाज कराने आते हैं। इसके अलावा 20 से अधिक इमरजेंसी मरीज और प्रसव कराने वाली महिलाएं आती हैं। इतने मरीज आने के बाद भी उनके बैठने के लिए समुचित कुर्सी या बेंच तक नहीं है। समय पर साफ-सफाई नहीं होने से अस्पताल परिसर में जगह-जगह गंदगी फैली हुई है।
अस्पताल परिसर में बड़ी-बड़ी झाड़ियां उग आई हैं। वार्डों के खिड़कियों पर लगी जालियां फट गई हैं। मरीजों के लिए लाखों रुपये खर्च कर लगवाया गया आरओ वाटर फ्रिज काफी दिनों से खराब है। सीएचसी के प्रसव वार्ड, जनरल वार्ड, इंसेफेलाइटिस वार्ड के लिए दो शौचालय बने हैं। इसमें से एक खराब हो चुका है, जबकि दूसरा प्रयोग लायक नहीं है। इसका फाटक टूट गया है। करीब चार दिन पहले सीएचसी का निरीक्षण करने पहुंचे पडरौना के एसडीएम महात्मा सिंह ने अन्यूज्ड शौचालय को सही कराने के निर्देश भी दिए थे।
प्रसव के लिए आईं महिलाओं को नहीं मिलता बढि़या भोजन
सीएचसी में प्रसव कराने आने वाली महिलाओं को 150 रुपये की लागत से नाश्ता एवं भोजन देना है। लेकिन दुदही सीएचसी में महिलाओं को नाश्ता नहीं मिलता है। भोजन के नाम पर केवल चार रोटी एवं थोड़ी सब्जी पॉलिथीन में बांधकर दिया जा रहा है, जबकि नाश्ते में चाय, बिस्कुट या ब्रेड देना होता है। इसी तरह भोजन में चावल, दाल, रोटी, दूध, अंडा, पनीर दिया जाना है।
क्या कहते हैं मरीज
बेटी आरती को प्रसव के लिए सीएचसी ले आई हूं। गर्मी में सभी लोग परेशान हैं। बिजली रहने पर पंखा चल रहा है। भोजन के नाम पर चार रोटी और सब्जी मिली है। शौच के लिए बाहर जाना पड़ रहा है।
- लालमती, निवासी जंगल सिसवा
अस्पताल परिसर में बना शौचालय खराब पड़ा है। इसलिए शौच के लिए बाहर खेत में जाना पड़ रहा है।
- आशा देवी, निवासी रामपुर बरहन
अस्पताल में बैठने के लिए कुर्सियां तक नहीं है। इसलिए फर्श पर बैठना पड़ रहा है। इतनी उमस भरी गर्मी में बिजली कटने के बाद पंखा नहीं चल रहा है। यह दुर्व्यवस्था है।
- रामप्रीत, निवासी, सुमही
अस्पताल में पेजयल की कोई व्यवस्था नहीं है। अस्पताल परिसर में दो हैंडपंप लगे हैं। दोनों खराब हैं। आरओ वाटर में फ्रीजर खराब होने से उसमें से गर्म पानी निकलता है। अस्पताल में चारों तरफ गंदगी फैली है।
- संजय गुप्ता, निवासी, जंगल सिसवा
कोट
अस्पताल का शौचालय पहले से खराब था, उसे ठीक कराया हूं। पूरी तरह से ठीक नहीं हुआ है। जल्द ही चार शौचालयों का निर्माण कराया जाएगा। आरओ वाटर के फ्रीजर में करंट आने के चलते बिजली की सप्लाई कटवाई गई है। बिजली रहने पर पंखा चल रहा है। जेनरेटर चलाने के लिए कोई अतिरिक्त खर्च नहीं आता है। भोजन देने वाले वेंडर का टेंडर बदला है। इसको देखवा लेता हूं।
- डॉ. अरविंद कुमार, प्रभारी चिकित्साधिकारी