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पांच वर्षों से घर वापस की गुहार लगा रहे हैं सात बंधक

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सऊदी अरब में फंसे लोग। - फोटो : KUSHINAGAR
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पांच वर्षों से घर वापस की गुहार लगा रहे हैं सात बंधक
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कुशीनगर। सऊदी अरब के रियाद शहर के पास एक कंपनी ने मजदूरी करने गए कुशीनगर जिले के चार मजदूरों समेत कुल सात लोगों को बंधक बनाकर रखा है। इनमें से कुछ लोग पांच वर्ष से वहां बंधक हैं। बंधक बने युवकों से कैदियों जैसा व्यवहार किया जा रहा है। इन युवकों ने किसी सहयोगी के मोबाइल से वीडियो बनाकर खुद के फंसे होने की सूचना घरवालों को दी थी। परिजनों ने इस मामले में विदेश मंत्रालय से संपर्क किया है। मामले की जानकारी होने पर प्रवासी भारतीय मदद समूह के सदस्य भी विदेश मंत्रालय के संपर्क में हैं।
सऊदी अरब में अच्छी नौकरी की लालच में जिले से बड़ी संख्या में नौजवान हर साल वहां जाते हैं। ऐसे ही उम्मीद में पांच साल पहले पडरौना कोतवाली के मिश्रौली गांव निवासी वसीम, रिजवान और आरिफ तथा बरवापट्टी थाना क्षेत्र का कैलाश वहां पहुंचे थे। जिस कंपनी में ये लोग काम करते थे, वह किसी कारण से बंद हो गई। इसके बाद स्वदेश वापसी की जगह इन लोगों को रियाद शहर के पास एक कैंप में भेज दिया गया। वीजा अवधि खत्म होने व पासपोर्ट भी नहीं मिलने के कारण ये लोग अब वहां बंधक बनकर रह गए हैं। इन चार के अलावा वहां प्रयागराज जिले के उतरन गांव निवासी राजेंद्र मौर्या, राजस्थान के रतनगढ़ निवासी हिदायत अली व बिहार प्रांत के सिवान जिले के सरहरवा धरौली निवासी घनश्याम ठाकुर फंसे हुए हैं। कई बार ये मजदूर किसी माध्यम से अपना वीडियो बनाकर परिजनों को भेज चुके हैं। लेकिन अब तक किसी की वतन वापसी नहीं हो पाई है।
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परिजन पांच साल से कर रहे हैं कैलाश का इंतजार
बरवापट्टी/दुदही। बरवापटटी थाना क्षेत्र के गांव रामपुर बरहन टोला गोबरही निवासी कैलाश कुशवाहा पुत्र ध्रुव कुशवाहा के बंधक बनाये जाने की जानकारी जब से परिजनों को हुई है, वे परेशान हैं। पत्नी पूनम का रो-रोकर बुरा हाल है।
पूनम ने बताया कि उसके पति 14 मार्च वर्ष 2014 को सऊदी अरब की कंपनी रांकान ट्रेडिंग कंस्ट्रक्शन अलखोबार में काम करने गये थे। वहां से उसके पति और अन्य मजदूरों को रियाद के बगल के पास कैंप में रखा गया। कुछ दिनों तक सबकुछ ठीक रहा, लेकिन बाद में कंपनी ने सैलरी देना बंद कर दिया। खाना भी समय सें नहीं दिया जाता है। मालिक महीने में एक बार आता है और प्रत्येक को 200-200 रुपये देकर चला जाता है। किसी तरह एक समय भोजन करके समय बिता रहे हैं। जिसके चलते ये सभी लोग बीमार व कमजोर हो गए हैं।
घरवालों ने विदेश मंत्रालय से संपर्क किया तो भारतीय दूतावास के कर्मचारी वहां पहुंचे और हालात की जानकारी ली। इसके बाद कैलाश समेत वहां बंधक सभी मजदूरों के लिए भोजन एवं दवा का इंतजाम कराया। व्यस्था किये है। पूनम के अनुसार बातचीत में जानकारी हुई कि उनके पति का पासपोर्ट भी कंपनी ने जब्त कर लिया है, जिसके कारण वे लोग कैंप से बाहर नहीं निकल सकते।
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इस मामले की जानकारी होने पर प्रवासी भारतीय मदद समूह के विजय मद्धेशिया ने भारतीय राजदूत से संपर्क किया है। इसके अलावा इसी संगठन से जुड़े अरविंद सागर ने भी विदेश मंत्रालय के नई दिल्ली कार्यालय पहुंचकर पीड़ितों की मदद के लिए पत्रक दिया है।
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