कुशीनगर। चक्रवाती तूफान मोंथा के चलते बृहस्पतिवार व शुक्रवार को हुई बारिश से राजकीय आलू प्रक्षेत्र (बरवाफार्म) कसया में बोए गए आलू के खेत में पानी भर गया है। इससे आलू बीज के सड़ने का खतरा पैदा हो गया है। विभाग के मुताबिक इस बारिश से जहां बोए गए आलू के सड़ने की आशंका बनी हुई है, वहीं बाकी खेत में आलू की बोआई में देरी होगी।
यही नहीं रिमझिम बारिश ने खेत में तैयार धान की फसलों को भी काफी नुकसान पहुंचाया है। विभागीय आकड़े के मुताबिक बारिश ने करीब 10 फीसदी धान की फसल नष्ट कर दिया है। बारिश की वजह से खेत नमी अधिक होने की वजह से अब रबी की बुआई भी देरी से होगी।
उद्यान विभाग की तरफ से राजकीय आलू प्रक्षेत्र केंद्र बरवाफार्म में बीज उत्पादन के लिए कुल पांच हेक्टेयर में अभी आलू की बुआई की गई है।
जबकि कुल सात हेक्टेयर में बोआई की जानी है। फार्म में हर साल निर्धारित लक्ष्य के मुताबिक आलू की बोआई की जाती है। इस वर्ष भी बीज उत्पादन के लिए कुफरी बहार प्रजाति 3.86 हेक्टेयर, कुफरी सिंदूरी 0.69 हेक्टेयर ओवर साइज व 0.45 हेक्टेयर में बीज साइज आलू की बोआई की गई है।
यह बोआई फार्म में बीते 22 से 29 अक्तूबर के बीच की गई है। बृहस्पतिवार व शुक्रवार को हुई बारिश के चलते बोए गए आलू के सड़ने की संभावना बढ़ गई है। फार्म में बोए गए आलू की मौजूदा स्थिति का जायजा लेने शनिवार को उद्यान विभाग के उप निदेशक राजेंद्र कुमार यादव ने फार्म पहुंचकर निरीक्षण किया।
उन्होंने कहा है कि बारिश का पानी बोए गए आलू के खेत में लग गया है। इसके चलते उसके सड़ने की पूरी संभावना बनी हुई है। जल निकासी का कोई बंदोबस्त नहीं है। इससे आलू उत्पादन प्रभावित होगा। उद्यान प्रक्षेत्र प्रभारी पत्रिका सिंह ने कहा कि बारिश के चलते बहुत ही नुकसान हुआ है। इस स्थिति की शीर्ष विभागीय अधिकारियों को जानकारी दे दी गई है। उनके अनुसार ही आगे निर्णय लिया जाएगा।
लखनऊ और बस्ती जाता है उत्पादित बीज
राजकीय आलू प्रक्षेत्र बरवाफार्म में उत्पादित आलू का उपयोग बीज के लिए किया जाता है। फार्म में आलू उत्पादन के बाद लखनऊ स्थित अलीगंज राजकीय शीत गृह भेज दिया जाता है। जबकि मेथी और अन्य बीज उत्पादन कर प्रसंस्करण केंद्र बस्ती भेजा दिया जाता है।