न तो लोग जागरूक हैं और न ही स्वास्थ्य महकमा ही तैयार
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरवलिया बाजार/उजारनाथ ( कुशीनगर)। कोरोना को रोकने के लिए अचूक हथियार टीकाकरण को लेकर न तो लोग जागरूक हैं और न ही स्वास्थ्य विभाग। खुद विभाग के पास ऐसी कोई योजना नहीं है कि गांव में भेजी जा रही टीम को पूरे गांव के टीकाकरण के लिए कितनी मात्रा में दवा, इंजेक्शन, कर्मचारी आदि की जरूरत होगी। दूसरी तरफ महामारी से मौत के दौरान दहशत में जी रहे लोग भी दरवाजे पर आई टीम से भी टीका लगवाने में संकोच कर रहे हैं। बृहस्पतिवार को अमर उजाला टीम ने तमकुहीराज ब्लॉक के सपही खुर्द गांव की हकीकत देखी।
-प्रस्तुत है इसकी लाइव रिपोर्ट-
केवल 10 बॉयल लेकर पहुंची थी टीम
गांव में 45 वर्ष से ऊपर के लोगों का टीकाकरण करने एक टीम सपही खुर्द गांव में पहुंची थी। इस गांव की कुल आबादी 1024 है। इसमें से 206 लोग 45 वर्ष से अधिक उम्र के हैं। इसमें 112 पुरुष व 94 महिलाएं हैं। इसमें से 24 लोगों को पहले टीका लग चुका है। बृहस्पतिवार की सुबह 10 बजे से दोपहर बाद तीन बजे तक केवल 10 लोगों का टीका लगा, जिसमें से चार पुरुष व छह महिलाएं शामिल रहीं। इन 10 में से भी दो लोग पहले टीका लगवा चुके थे। आज दूसरा डोज लगा। मतलब कि केवल आठ नए लोगों ने टीका लगवाया।
टीम को कुछ खास पता नहीं
टीकाकरण के लिए आईं एएनएम वंदना सिंह और आशा अफसाना खातून ने बताया कि बीएचडब्लू ने जो डाटा फीड किया है, उसके अनुसार टीकाकरण का लक्ष्य मिला है। उन्हें आज यहां के लिए पांच बॉयल (कुल 50 डोज) टीका मिला है। गांव की आबादी 1024 है, ऐसे में अगर सभी लोग टीकाकरण के लिए पहुंचें तो क्या होगा? इसका जवाब नहीं मिला। एएनएम का तर्क था कि अगर जरूरत पड़ेगी तो तुरंत व्यवस्था करा दिया जाएगा। आशा का कहना है कि वह सुबह से लोगों को टीकाकरण की सूचना दे रही है। परंतु लोग टीका लगवाने को तैयार नहीं हैं।
टीकाकरण को लेकर मन में हैं भ्रांतियां
इस गांव की कृष्णावती ने अब तक टीका नहीं लगवाया है। इनका कहना है कि हमें आंख की बीमारी है। टीका लगने से बीमारी बढ़ जाएगी।
इसी गांव की कैलाशी का कहना था कि स्वास्थ्यकर्मियों व नेताओं के लिए दूसरा टीका था, हम लोगों के लिए दूसरा टीका है। इससे सेहत पर प्रभाव पड़ता है। टीका लगवाने वाले भी बीमार पड़ जाते हैं।
सईदनी का कहना था कि टीका लगवाने से ही लोग बीमार हो रहे हैं। बीमारी अपने आप खत्म हो रही है। बागेश्वरी राय का कहना था कि पेट की बीमारी से परेशान हैं। ठीक होने पर टीकाकरण के बारे में सोचेंगे।
जागरूकता की कमी ही सबसे अहम कारण
इस गांव के कई लोग देश व प्रदेश के बड़े शहरों में रोजगार के लिए जाते हैं। कुछ लोगों का कहना है कि वे जहां कार्य करते थे वहां टीका लगवा लिए हैं। इस गांव के दो होनहार पीसीएस अफसर हैं तो वहीं कई अध्यापक भी हैं लेकिन जागरूकता के मामले में गांव काफी पिछड़ा है। स्वास्थ्य टीम के पूरे दिन के प्रयास के बावजूद इस गांव में केवल आठ नए लोगों को टीका लगना इस बात को प्रमाणित करता है कि अभी बहुत प्रयास किया जाना बाकी है।