पूरी हुई माननीयों के मन की मुराद, चार बार सांसद रहे रामनगीना मिश्रा ने राम मंदिर के लिए छोड़ी थी कांग्रेस
पडरौना। बुधवार को जब अयोध्या में करोड़ों हिंदुओं की आस्था के प्रतीक भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन हो रहा था तब अन्य लोगों से अधिक प्रसन्नता जिले की तीन खास शख्सियतें के चेहरे पर थी। इनमें से एक तो 93 वर्ष की अवस्था में भी इतने उल्लसित थे कि पूरे दिन राम नाम का जाप ही करते रहे। राम मंदिर आंदोलन के साक्षी रहे इन तीनों को इस खास तारीख का लंबे समय से इंतजार था।
पडरौना (कुशीनगर) लोकसभा सीट से वर्ष 1991 में भाजपा के टिकट पर सांसद चुने गए रामनगीना मिश्रा बुधवार की सुबह से ही बेहद उत्साहित थे। इनके पुत्र डॉ. परशुराम मिश्रा ने बताया कि आज पिताजी सुबह ही टीवी के सामने बैठ गए। रामनगीना मिश्रा वह शख्स थे जिन्होंने वर्ष 1988 में सलेमपुर से कांग्रेस का सांसद रहते हुए भी लोकसभा में राम मंदिर के लिए प्रस्ताव रखा था। सांसद सहाबुद्दीन ने इस पर आपत्ति जताई तो रामनगीना मिश्रा अयोध्या गए और वहां से साक्ष्य जुटाकर दुबारा सदन में रखा। बाद में इसी मुद्दे पर राजीव गांधी से टकराव के चलते कांग्रेस छोड़ दी। कांग्रेस नेता लोकपति त्रिपाठी के सगे रिश्तेदार होने व नारायण दत्त तिवारी व जितेंद्र प्रसाद से घनिष्ठता के बावजूद कांग्रेस का टिकट तक ठुकरा दिया और अशोक सिंघल के साथ संघ दफ्तर पहुंचकर भाजपा में आए गए। वर्ष 1991 से लेकर 2004 तक पडरौना से भाजपा के सांसद रहे रामनगीना मिश्रा का कहना है कि अंतिम वक्त में मन की सबसे बड़ी इच्छा पूरा होना बेहद खास है।
भुलई भाई भी दिखे उत्साहित, लगाया जय श्रीराम का नारा
वर्ष 1977 में जनसंघ के टिकट पर नेबुआ नौरंगिया से विधायक रहे श्रीनारायण उर्फ भुलई भाई अटल बिहारी वाजपेयी के करीबी थी। संघ से जुड़ने के बाद उन्होंने नौकरी छोड़ दी थी। वर्ष 1988 में जब राम मंदिर निर्माण के आंदोलन में भाजपा सक्रिय रूप से शामिल हुई तो भुलई भाई भी आंदोलन के साथी बने। वर्ष 1990 में लालकृष्ण आडवाणी की रथयात्रा में शामिल होने व 1992 में अयोध्या में जाकर कार सेवा करने में भी आगे रहे। बुधवार को राम मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन होने पर इन्होंने बेहद खुशी जताते हुए कहा कि उम्र के आखिरी पड़ाव में ही सही लेकिन अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण शुरू होता देखना बेहद खास अनुभव है।
अब जाकर कम हुई जेल की पीड़ा : दीपलाल भारती
वर्ष 1988 में खड्डा टाउन एरिया के चेयरमैन चुने गए दीपलाल भारती को अगले साल ही राम मंदिर आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने के चलते पुलिस ने टाउन एरिया कार्यालय से ही गिरफ्तार कर लिया था। जेल से छूटकर आने के बाद वर्ष 1991 में भाजपा के टिकट पर नेबुआ नौरंगिया (खड्डा) से विधायक चुने गए। वर्ष 1992 में बाबरी मस्जिद ध्वंस के बाद सरकार चली गई। अगले चुनाव में ये हार भी गए। हालांकि वर्ष 1996 में पुन: यहीं से भाजपा के टिकट पर विधायक बने। बुधवार को पूरे दिन टीवी के सामने बैठे रहे दीपलाल भारती ने कहा कि बस्ती व देवरिया जेल में मिले कष्ट राम मंदिर के लिए भूमि पूजन होते ही गर्व की सुखद अनुभूति में बदल गया है।