पडरौना। तुर्कपट्टी थाना क्षेत्र के छहूं गांव निवासी सपा नेता जिला पंचायत सदस्य अमरेश यादव के जेल जाने के बाद इसके गुर्गे भूमिगत हो गए हैं, पांच माह से फरार चल रहा गैंगस्टर भी अमरेश के संपर्क रहा, लेकिन अभी तक पुलिस के हाथ नहीं लगा। जिला पंचायत सदस्य के जमानत लेने वालों पर पुलिस की नजर है।
पूर्व में दर्ज प्राथमिकी में जो लोग जमानत लिए हैं, उनका भी पुलिस सत्यापन कराएगी। तुर्कपट्टी थाना क्षेत्र के अधिकतर पशु तस्कर इन दिनों घर छोड़कर फरार हैं। पुलिस इनके बारे में पता लगाने में दिन रात एक कर दी है। जिले में फैले पशु तस्करी के नेटवर्क को तोड़ने के लिए पुलिस कार्रवाई तेज कर दी है। अमरेश यादव पर पूर्व में 32 प्राथमिकी दर्ज हैं, इसमें 30 से अधिक लोगों ने जामनत लिया है।
यह जमानतदार कौन हैं, कहा के रहने वाले हैं और इनकी गतिविधि क्या है। इसकी जानकारी पुलिस जुटा रही है। इसमें जमानत लेने वाले अधिकांश छहूं गांव के रहने वाले लोग ही शामिल हैं। इसके अलावा इन दिनों जमानत लेने वाले भी पुलिस की नजर पर हैं। सूत्रों की माने तो अमरेश का नेटवर्क गोपालगंज जिले में भी सक्रिय है।
मोबाइल काल डिटेल से इसकी जानकारी पुलिस को मिली है। तुर्कपट्टी थाने का गैंगस्टर संतोष की तलाश करीब चार माह से पुलिस कर रही है, लेकिन उसका पता नहीं लगा पा रही है। पुलिस का दावा है कि फरार गैंगस्टर अमरेश के संपर्क में है।
बाहरी तस्करों के लिए भी सेफ जोन रहा है तुर्कपट्टी का इलाका
गुरवलिया बाजार। अमरेश की गिरफ्तारी के बाद तस्करी के पुराने कारनामों को लेकर भले ही तुर्कपट्टी क्षेत्र चर्चा में हैं लेकिन इसके अलावा भी यह क्षेत्र बदनाम रहा है। लगातार पश्चिमी यूपी और पूर्वांचल के कुख्यात तस्कर भी इस थाना क्षेत्र में सक्रिय मिले दिखे।पडरौना के कुख्यात बसहिया बनवीरपुर गांव की ही तरह पशु की तस्करी और कुख्यात तस्करों के मामले में जिले के तुर्कपट्टी थाना क्षेत्र का छहूं, रुदवलिया,बसडीला आदि गांव कुख्यात है जहां अकेले एक गांव में सात लोगों पर तस्करी के सत्तर से अधिक केस दर्ज हैं तो आसपास के तस्करों का भी गैंग है जो पूर्व में गोरखपुर में पत्थरबाजी और आसपास के जनपदों में पशुओं की खेप को इधर उधर करते पकड़ा जा चुका है, लेकिन यह तो रहा स्थानीय तस्करों का नाम, इसके अलावा भी इस क्षेत्र में पश्चिमी यूपी के कुख्यात तस्कर हाजी माजिद भी गिरफ्तार हो चुका है।कई अन्य नाम रहे हैं।इसके अलावा इस क्षेत्र के कुछ सुनसान इलाके भी बाहरी तस्करों को खूब भाते रहे हैं जहां वह पूर्व में योजना बनाते रहे हैं और फिर बिहार तक तस्करी होती रही लेकिन इधर पुलिस की सक्रियता से कुछ हद तक इस क्षेत्र में कम हो गई।