पडरौना। शहर से लेकर कस्बों तक आयोजित किए जाने वाले डोल मेलों को लेकर पुलिस विभाग और प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। एक सितंबर से शुरू होने जा रहे डोल मेले में शांति, सुरक्षा और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए बेहतर बंदोबस्त रहेगा। ऐसे में प्रशासन डोल मेले का आयोजन केवल पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ ही किए जाने पर जोर दिया है। प्रशासन की ओर से किसी भी नए डोल मेले की शुरुआत अथवा नई परंपरा की अनुमति बिल्कुल नहीं है।
कुशीनगर में डोल मेला आस्था, कला और सामाजिक सौहार्द का प्रतीक माना जाता है। जिसमें कुछ प्रमुख शहर व कस्बों में डोल मेले का खास आकर्षण देखने को मिलता है। पडरौना शहर का डोल मेला सबसे भव्य माना जाता है। यहां शहर के विभिन्न मोहल्लों व गलियों से भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीला और धार्मिक संवादों पर आधारित भव्य झांकियां (डोल) निकाली जाती है।
मुख्य बाजारों और राजदरबार क्षेत्र से होकर गुजरने वाले डोल मेले को देखने के लिए हजारों की तादाद में भक्त व श्रद्धालु उमड़ पड़ते हैं। वहीं हाटा और कप्तानगंज कस्बों में भी परंपरागत तरीके से भव्य डोल जुलूस निकाले जाते हैं, जहां ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों के लोग शामिल होते हैं। रामकोला और खड्डा तहसीलों व कस्बों में भी अखाड़ों और समितियों की ओर से डोल मेले का आयोजन होता है। जिसमें पारंपरिक शस्त्र कौशल और झांकियों का प्रदर्शन किया जाता है। सेवरही में भी डोल जुलूस की पुरानी परंपरा है।
इस मेले में बिहार के सीमावर्ती क्षेत्रों के लोग भी मेले का आनंद लेने आते हैं। इसके अलावा कसया तहसील क्षेत्र व कस्बे में भी डोल मेले का आयोजन किया जाता है। ऐसे में जिला प्रशासन ने लोगों और मेला समितियों से अपील की है कि पारंपरिक उत्सव को आपसी भाईचारे और शांति के साथ मनाएं और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तत्काल नजदीकी थाने व पुलिस हेल्पलाइन को देकर प्रशासन का सहयोग करें।ताकि समय रहते मामले को निपटा लिया जाए और शांति व्यवस्था बनी रहे।
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ड्रोन से की जाएगी निगरानी, पुलिस कर्मियों की तैनाती
जिले में एक सितंबर से आरंभ होकर कई दिनों तक चलने वाले डोल मेला के दौरान बेहतर व्यवस्था और सुरक्षा बनाए रखने के लिए करीब 1500 से अधिक पुलिसकर्मियों, पीएसी के जवानों और होमगार्डों की तैनाती की गई है। वहीं अति संवेदनशील इलाकों, चौराहों और जुलूस के मुख्य मार्गों पर सीसीटीवी कैमरों के साथ-साथ ड्रोन से निगरानी रखी जाएगी। पुलिस महकमा ने सख्त लहजे में कहा है कि जुलूस के दौरान माहौल खराब करने व अफवाह फैलाने की कोशिश करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा,उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।
तेज आवाज वाले डीजे और साउंड सिस्टम पर रोक
डोल मेले में तेज आवाज को रोकने और जुलूस के दौरान उच्च क्षमता वाले और तेज साउंड के डीजे पर पूरी तरह सख्ती बरती जाएगी। डोल मेला आयोजकों को केवल मानक ध्वनि सीमा के तहत ही साउंड सिस्टम व लाउडस्पीकर का उपयोग करने की अनुमति होगी। इसका उल्लंघन करने पर डीजे संचालकों के उपकरण जब्त किए जाएंगे और संबंधित समिति पर तत्काल कार्रवाई तय की जाएगी।
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जिले में आगामी डोल मेले को शांतिपूर्ण और सुरक्षित वातावरण में पूरा कराने के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। संवदेनशील स्थलों व जुलूस मार्गों पर ड्रोन व सीसीटीवी कैमरों से निगरानी रखी जाएगी। मेले में किसी भी नई परंपरा की अनुमति नहीं दी जाएगी। शासन के निर्देशानुसार तेज आवाज वाले डीजे सिस्टम पर रोक रहेगा। नियम तोड़ने वाले डीजे को सीज करते हुए संचालक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सभी आयोजक व संभ्रात नागरिक शांति व सौहार्दपूर्ण माहौल में मेला को मनाएं। - सिद्धार्थ वर्मा, एएसपी कुशीनगर