कुशीनगर। पश्चिम से पूरब तक फैले पशु तस्करी के खेल में जिले से भी बैकअप कम नहीं मिला है। जिले के रहने वाले लोगों ने पश्चिम और बिहार के पशु तस्करों की जमानत धड़ल्ले से ली है। इनका तस्करों से क्या संबंध है, इसका कनेक्शन पुलिस जुटा रही है।
पांच साल के अंदर जेल से रिहा होने वाले पशु तस्करों के जमानतदारों का सत्यापन डोर-टू-डोर एसपी के निर्देश पर हो रहा है। इसमें कसया थाने में फर्जी पासपोर्ट पर लाखों रुपये के बरामद गायों को सुपुर्दगी में लेने का मामला प्रकाश में आया है। इस मामले में केस दर्ज है लेकिन आरोपी का लोकेशन नेपाल में होने के कारण पुलिस की पकड़ से अभी दूर है। कुशीनगर के रास्ते बिहार में होने वाले गोवंश की तस्करी पर लगाम लगाने के लिए पुलिस ग्राउंड लेवल पर काम शुरू कर दिया है। गैंगस्टर या दर्ज मुकदमे में फरार चल रहे पशु तस्करों की गिरफ्तारी के अलावा जेल से रिहा होने वाले पशु तस्करों का जमानत लेने वालों के बारे में पुलिस पता लगा रही है। जमानत लेने के पीछे क्या वजह रही और किसके कहने पर लिया गया, एक हजार से अधिक जमानतदार हैं, जिसमें करीब 200 जमानतदारों का सत्यापन कर लिया गया है।
इसमें फर्जी अभिलेखों और पते पर जमानत लेने का मामला सामने आ रहा है। सत्यापन में पता चला कि कसया पुलिस ने गोवंश पशु पकड़ी थी। पुलिस ने कार्रवाई के बाद महराजगंज जिले के निचलौल थाना क्षेत्र के देसो टोला निवासी दिलीप कुमार पुत्र लल्लन यादव की सुपुर्दगी में गायों को दे दिया। साक्ष्य के तौर पर दिलीप अपना पासपोर्ट का फोटो कॉपी पुलिस को दिया था। सत्यापन के दौरान पुलिस उक्त पते पर पहुंची तो लल्लन यादव तो मिले और बताया कि दिलीप नाम का कोई बेटा उनका नहीं है।
उनके दो बेटे हैं जो बाहर काम करते हैं। पुलिस ने वीडियो काल के जरिए उनसे बात की और परिवार रजिस्टर का नकल तथा गांव के प्रधान का बयान लेकर लौट आई। नेपाल का रहने वाला दिलीप लल्लन यादव को अपना फर्जी पिता बताकर उनके पते पर पासपोर्ट बनवा लिया था। लल्लन यादव की तहरीर पर कसया थाने में दिलीप और अज्ञात लोगों पर पुलिस ने केस दर्ज किया है। सूत्रों की माने तो जांच में पता चल रहा है कि गैर जिलों के कुख्यात पशु तस्करों का जमानत लेने वाले अधिकांश जमानतदार रुपये की लालच में ऐसा किए हैं। दिलीप की तलाश पुलिस कर रही है लेकिन नेपाल में लोकेशन होने के कारण उसे गिरफ्तार नहीं कर पा रही है।
गोरखपुर के पिपराइच थाना क्षेत्र के महुआचाफी गांव में युवक की हत्या के बाद जिले के दो इंस्पेक्टर, दरोगा और सिपाहियों समेत 25 पुलिसकर्मियों की संलिप्ता मिली थी। तत्कालीन एसपी संतोष मिश्रा की भूमिका संदिग्ध मानते हुए जिले से हटा दिया गया।