कवि सम्मेलन में कवियों ने रचनाएं सुनाकर तारीफ पाई
तरयासुजान। कुशीनगर महोत्सव के तहत बृहस्पतिवार की रात में दनियाड़ी स्थित द प्रेसिडेट स्कूल के प्रांगण में कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ। दूर-दूर से आए कवियों ने अपनी रचनाएं सुनाईं। ठंड के बावजूद बड़ी रात तक लोग कवि सम्मेलन का आनंद लेते रहे।
कवि सम्मेलन की शुरूआत गोरखपुर से आईं कवयित्री निशा राय की वाणी वंदना, ज्ञान की ज्योति जगा दे मां, इस हृदय का अंधेरा मिटा दे मां, से हुई। संचालन कर रहे कवि दमदार बनारसी ने नारी सशक्तीकरण पर जोर देते हुए, अपनी रचना कैसे कहते हो, अबला की रूप है नारियां, शक्ति की स्वरूप हैं नारियां, सुनाकर तालियां बटोरीं। गोरखपुर से आए कवि दिनेश तिवारी ने टूटते पारिवारिक संबंधों पर चोट करते हुए अपनी रचना, भाई बंटईले त का भईल, माईयो बंटा गईली, सुनाकर लोगों को सोचने पर विवश कर दिया।
देवरिया से आए हास्य कवि बादशाह प्रेमी की रचना, हंस कर हंसा कर मानसिक आराम देना है, अजी हिंदू मुसलमान सिक्ख ईसाई से क्या लेने, फकत इंसानियत के नाम कुछ पैगाम देना है, को लोगों ने खूब पसंद किया। कवि सम्मेलन में मनीष मयूर, कुमार विकास, आशुतोष त्रिपाठी, सत्यमवंदा शर्मा, जितेंद्र नाथ पांडेय आदि ने अपनी रचनाएं सुनाईं। इस दौरान विनय राय, प्रहलाद राय, केशव राय, अनुभव कृष्ण, राजेश राय, रजनीश राय आदि मौजूद रहे।