गरीबों की बस्ती में योजनाएं बेहाल
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पडरौना। शहर से सटे गांव रामधाम विशुनपुरा की एक बस्ती कुष्ठ रोगियों की बस्ती के नाते मशहूर है। सरकारी कर्मचारियों के अलावा कई स्वयं भू समाजसेवी भी इस बस्ती को चमकाने के लिए दिन रात एक किए रहते हैं लेकिन महज 24 परिवारों की यह बस्ती आज भी बदहाली की कहानी कह रही है। दो वर्ष पहले जिनके घर आग से जल गए थे वे आज भी सुविधाओं की बाट जोह रहे हैं। न पीने के लिए शुद्ध पानी का इंतजाम है और न ही रहने के लिए ढंग का मकान। रोजगार का आलम यह है कि इनमें से कई परिवारों का गुजारा अब भी भीख मांगकर ही होता है।
शहर से लगभग दो किलो मीटर की दूरी पर स्थित रामधाम विशुनपुरा के एक टोले में कुष्ठ रोग से पीड़ित पांच परिवार रहते हैं। इनके नाते पूरी बस्ती को ही कुष्ठ रोगियों की बस्ती कहा जाता है। सरकारी सुविधा के नाम पर कुष्ठ रोगियों को हर महीने 300 रुपये की पेंशन मिलती है। परंतु महज इतनी मदद से परिवार का खर्च चलाने से लेकर दवाई, पढ़ाई आदि का इंतजाम होने की कल्पना करना भी बेमानी है। वर्ष 2015 में आग लगने के कारण यहां कई लोगों की रिहायशी झोपड़ी जल गई थी। अधिकारियों ने गांव का दौरा कर वास्तविक स्थिति को देखा और सभी 24 परिवारों को इंदिरा आवास का लाभ देने की घोषणा हुई। मकानें बनीं भी लेकिन गुणवत्ता ऐसी थी कि पहली बरसात में ही छतों से पानी टपकने लगा। यहां के लोग बताते हैं कि कोटेदार और प्रधान की ओर से इन्हें हर माह थोड़ा-बहुत राशन उपलब्ध कराया जाता है। यहां रहने वाले मोहम्मद करीम, शिवनाथ, कमरून नेशा, मुन्नी आदि का कहना था कि सरकारी सुविधाओं का लाभ दिलाने के लिए अधिकारियों की ओर से पहले आधार कार्ड बनवाने को कहा गया। परंतु जिनके आधार कार्ड बने उन्हें अभी भी सुविधाएं नहीं मिलीं।